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'विपक्ष का नेता हूं, लेकिन सदन में बोलने नहीं दिया जाता', राहुल गांधी ने सरकार और संसद प्रणाली पर उठाए सवाल

लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने का गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का समान अवसर नहीं देती.

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Garima Singh

Rahul Gandhi: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी ने संसद में विपक्ष की आवाज को दबाने का गंभीर मुद्दा उठाया. उन्होंने सरकार पर आरोप लगाया कि वह विपक्षी नेताओं को अपनी बात रखने का समान अवसर नहीं देती. इस मुद्दे ने संसद के भीतर और बाहर व्यापक चर्चा को जन्म दिया है.

राहुल गांधी ने लोकसभा में अपनी बात रखते हुए कहा कि संसद में केवल सत्तापक्ष के नेताओं को बोलने की अनुमति दी जाती है, जबकि विपक्ष के नेताओं को उनकी बात रखने का अवसर नहीं मिलता. उन्होंने जोर देकर कहा, "सवाल ये है कि जो सदन में रक्षा मंत्री को बोलने देते हैं, उनके(सरकार) लोगों को बोलने देते हैं लेकिन अगर विपक्ष का कोई नेता कुछ कहना चाहता है तो अनुमति नहीं है." यह बयान संसद में लोकतांत्रिक प्रक्रिया और निष्पक्षता पर सवाल उठाता है.

विपक्ष के नेता का हक

राहुल गांधी ने अपनी भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि विपक्ष के नेता के रूप में उन्हें बोलने का अधिकार है, लेकिन उन्हें बार-बार चुप कराया जाता है. उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा, "मैं विपक्ष का नेता हूं मेरा हक है, मुझे कभी बोलने ही नहीं देते हैं..." यह बयान संसद में विपक्ष की भूमिका और उसके अधिकारों पर गंभीर सवाल खड़े करता है. उन्होंने यह भी जोड़ा कि संसदीय परंपराओं के अनुसार, यदि सत्तापक्ष को बोलने का अवसर मिलता है, तो विपक्ष को भी समान अवसर मिलना चाहिए.

संसदीय परंपराओं का सम्मान जरूरी

राहुल गांधी ने संसदीय परंपराओं का हवाला देते हुए कहा, "परंपरा कहती है कि अगर सरकार की तरफ से लोग बोल सकते हैं, तो हमें भी बोलने की जगह मिलनी चाहिए." उन्होंने जोर दिया कि संसद लोकतंत्र का मंदिर है, और यहां सभी पक्षों को अपनी बात रखने का समान अधिकार होना चाहिए. यह बयान न केवल संसद की कार्यवाही में निष्पक्षता की मांग करता है, बल्कि देश के लोकतांत्रिक मूल्यों को भी मजबूत करने की अपील करता है. चर्चा की जरूरतराहुल गांधी के इस बयान ने संसद में निष्पक्षता और समानता के मुद्दे को फिर से सुर्खियों में ला दिया है.