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साजिश या संयोग? US -ईरान जंग के बीच भारत समेत 5 देशों की रिफाइनरियों में आग का सच क्या?

राजस्थान की पचपदरा रिफाइनरी में आग लगने से प्रधानमंत्री मोदी का उद्घाटन कार्यक्रम टल गया है. वैश्विक स्तर पर रिफाइनरियों में बढ़ती आग की घटनाओं ने अंतरराष्ट्रीय तेल आपूर्ति और सुरक्षा पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: राजस्थान के बाड़मेर जिले के पचपदरा में स्थित हिंदुस्तान पेट्रोलियम की नई रिफाइनरी में लगी भीषण आग ने न केवल एक बड़े प्रोजेक्ट के इंतजार को बढ़ा दिया है, बल्कि पूरी दुनिया में चिंता की लहर दौड़ गई है. करीब 13 साल की लंबी प्रतीक्षा के बाद इस रिफाइनरी का उद्घाटन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों होना था, लेकिन उद्घाटन से महज एक दिन पहले हुई इस दुर्घटना ने सबको स्तब्ध कर दिया. यह आग केवल एक स्थानीय हादसा नहीं है, बल्कि एक व्यापक वैश्विक ऊर्जा संकट का संकेत लग रही है.

मंगलवार को होने वाले भव्य उद्घाटन से ठीक एक दिन पहले रिफाइनरी की मुख्य प्रोसेसिंग यूनिट भीषण आग की चपेट में आ गई. शुरुआती जांच रिपोर्ट के अनुसार, हीट एक्सचेंजर सर्किट में वाल्व या फ्लैंज से अचानक हाइड्रोकार्बन लीक होने के कारण यह भयानक हादसा हुआ. हालांकि राहत की बात यह रही कि संयंत्र के मुख्य ढांचे को बहुत ज्यादा नुकसान नहीं हुआ है. पेट्रोलियम मंत्रालय ने इस मामले की गंभीरता को देखते हुए एक उच्चस्तरीय समिति गठित की है जो इस गंभीर तकनीकी विफलता की जांच करेगी.

वैश्विक स्तर पर बढ़ता पैटर्न

हैरानी की बात यह है कि पचपदरा की यह घटना कोई अकेली दुर्घटना नहीं है. फरवरी 2026 में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हवाई हमलों के बाद से पूरी दुनिया की प्रमुख रिफाइनरियों में आग लगने का एक रहस्यमय सिलसिला शुरू हो गया है. भारत के अलावा अमेरिका, रूस, ऑस्ट्रेलिया और मेक्सिको जैसे देशों में भी पिछले कुछ हफ्तों में ऐसी घटनाएं हुई हैं. रूस में जहां इसका कारण यूक्रेनी ड्रोन हमले हैं, वहीं अन्य देशों में इन्हें केवल 'तकनीकी खामी' का नाम दिया गया है.

तेल आपूर्ति पर गहराता संकट

ऑस्ट्रेलिया की विवा एनर्जी रिफाइनरी में 16 अप्रैल को लगी आग ने देश के लगभग 10 प्रतिशत ईंधन उत्पादन को पूरी तरह ठप कर दिया है. वहीं म्यांमार के होमालिन बंदरगाह पर हुए भीषण धमाके ने दस से अधिक तेल टैंकरों को जलाकर राख कर दिया. ईरान और अमेरिका के बीच बढ़ते तनाव ने अब तेल को एक रणनीतिक हथियार बना दिया है. स्ट्रेट ऑफ होर्मुज जैसे महत्वपूर्ण समुद्री रास्तों की घेराबंदी और युद्ध की नई धमकियों ने वैश्विक बाजार में तेल की कीमतों को आसमान पर पहुंचा दिया है.

साजिश या महज इत्तेफाक?

सोशल मीडिया पर अब सुरक्षा विशेषज्ञों और आम जनता के बीच यह बहस बेहद तेज हो गई है कि क्या ये आग की घटनाएं महज एक संयोग हैं. कई डिजिटल प्लेटफॉर्म्स पर विशेषज्ञों ने पहले ही चेतावनी दी थी कि भू-राजनीतिक खींचतान के कारण विरोधी देश तेल की सप्लाई बाधित करने के लिए गुप्त रूप से आग लगा सकते हैं. पचपदरा की आग को भी कई लोग इसी तेल सप्लाई रोकने के वैश्विक पैटर्न का हिस्सा मान रहे हैं. कुछ विशेषज्ञों का मानना है कि वेनेजुएला जैसे बड़े तेल भंडार वाले देशों को लाभ हो सकता है.

आम आदमी की जेब पर बोझ

इन आग की घटनाओं का सीधा असर अब आम जनता की रसोई और उद्योगों पर भी पड़ने लगा है. रिफाइनरियों के उत्पादन में गिरावट आने से बाजार में ईंधन की भारी कमी महसूस की जा रही है, जिससे परिवहन की लागत बढ़ गई है. दिलचस्प बात यह है कि दुनिया का सबसे बड़ा तेल आयातक देश चीन इन सभी हादसों से अब तक पूरी तरह बचा हुआ है. सरकारी अधिकारी इसे केवल तकनीकी खराबी बता रहे हैं, लेकिन लगातार हो रही इन घटनाओं ने वैश्विक अर्थव्यवस्था और सुरक्षा तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं.