SIR विवाद के बीच चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस की बात मानी, क्या निकलेगा बीच का रास्ता?
चुनाव आयोग ने 28 नवंबर को तृणमूल कांग्रेस के प्रतिनिधिमंडल से मुलाकात तय कर दी है. यह फैसला तब आया है जब पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर तनाव बढ़ गया है.
नई दिल्ली: चुनाव आयोग ने तृणमूल कांग्रेस के उस अनुरोध को मंजूरी दे दी है, जिसमें पार्टी ने आयोग से मुलाकात की मांग की थी. पश्चिम बंगाल में चल रही स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन यानी SIR प्रक्रिया को लेकर हाल के दिनों में विवाद काफी बढ़ गया है. इस बीच तृणमूल कांग्रेस के सांसद डेरेक ओ ब्रायन द्वारा भेजे गए अनुरोध पर कार्रवाई करते हुए चुनाव आयोग ने मुलाकात तय कर दी है.
सूत्रों के अनुसार आयोग ने 24 नवंबर 2025 के एक लेटर में, कमीशन ने पार्टी की अपने सांसदों के साथ एक ऑफिशियल मीटिंग की रिक्वेस्ट को माना. इस बात पर जोर देते हुए कि वह पॉलिटिकल पार्टियों के साथ रेगुलर और कंस्ट्रक्टिव बातचीत को बढ़ावा देता है, ECI ने मीटिंग शुक्रवार, 28 नवंबर को सुबह 11:00 बजे निर्वाचन सदन, अशोका रोड, नई दिल्ली में तय की है. पार्टी का दावा है कि इस बैठक में वह SIR प्रक्रिया से जुड़ी कई गंभीर आपत्तियों को सीधे आयोग के सामने रखेगी.
पश्चिम बंगाल में क्या है स्थिति?
इधर पश्चिम बंगाल में चल रही SIR प्रक्रिया को लेकर विवाद तेज हो गया है. यह प्रक्रिया 2026 विधानसभा चुनावों से पहले मतदाता सूची को अद्यतन करने के लिए चलाई जा रही है. हालांकि मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की पार्टी का आरोप है कि यह प्रक्रिया पक्षपातपूर्ण तरीके से की जा रही है. पार्टी का कहना है कि इसमें कई समुदायों को जानबूझकर निशाना बनाया जा रहा है और बड़ी संख्या में पात्र मतदाताओं के नाम गलत तरीके से हटाए जा रहे हैं.
तृणमूल कांग्रेस ने क्या लगाया आरोप?
तृणमूल कांग्रेस का आरोप है कि मतुआ समुदाय, अल्पसंख्यक वर्ग और आदिवासी समाज के मतदाता इस संशोधन प्रक्रिया में सबसे अधिक प्रभावित हो रहे हैं. पार्टी ने कहा है कि यदि तुरंत सुधार नहीं हुआ तो हजारों पात्र मतदाता मतदान अधिकार से वंचित हो सकते हैं.
सुवेंदु अधिकारी ने क्या लगाया आरोप?
इसी बीच विपक्ष के नेता सुवेंदु अधिकारी ने मुख्य चुनाव आयुक्त को एक विस्तृत शिकायत भेजी है. अपने पत्र में उन्होंने आरोप लगाया है कि तृणमूल सरकार पुलिस और प्रशासन का राजनीतिक उपयोग कर रही है. उन्होंने इसे संस्थागत पक्षपात बताया और चुनाव आयोग से तुरंत हस्तक्षेप करने की मांग की.
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