CAG Report: दिल्ली उच्च न्यायालय ने शुक्रवार को कैग (भारत के नियंत्रक और महालेखा परीक्षक) की कई रिपोर्टों को पेश करने के लिए राज्य विधानसभा की बैठक बुलाने का निर्देश देने से मना कर दिया.
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने मामले की सुनवाई करते हुए यह स्पष्ट किया कि अदालत इस विषय पर कोई आदेश जारी नहीं करेगी. हालांकि, न्यायमूर्ति ने यह भी कहा कि दिल्ली सरकार की ओर से इस मामले में अत्यधिक देरी की गई है.
इस मामले में उच्च न्यायालय के बयान से सरकार की कार्यशैली पर सवाल खड़े हुए हैं. रिपोर्ट को पेश करने में देरी क्यों हुई और इसे किस कारण रोका गया, इन मुद्दों पर सरकार को अब जवाब देना होगा.
कैग की रिपोर्टें सरकारी विभागों और उनकी योजनाओं की आर्थिक स्थिति और पारदर्शिता का मूल्यांकन करती हैं. इन्हें सार्वजनिक करना न केवल सरकार की जिम्मेदारी है, बल्कि यह जनता को भी शासन में पारदर्शिता का भरोसा दिलाने का एक माध्यम है.
न्यायमूर्ति सचिन दत्ता ने हालांकि कहा कि इस मामले में दिल्ली सरकार की ओर से अत्यधिक देरी की गई है. अदालत ने इस बात पर जोर दिया कि ऑडिट रिपोर्ट पेश किया जाना संविधान के तहत अनिवार्य है.
उच्च न्यायालय ने कहा, अदालत विधानसभा की विशेष बैठक बुलाने संबंधी याचिकाकर्ता के अनुरोध को स्वीकार करने के लिए इच्छुक नहीं है.'
दिल्ली विधानसभा में विपक्ष के नेता विजेंद्र गुप्ता और भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के विधायकों मोहन सिंह बिष्ट, ओम प्रकाश शर्मा, अजय कुमार महावर, अभय वर्मा, अनिल कुमार बाजपेयी और जितेंद्र महाजन ने पिछले साल याचिका दायर की थी और विधानसभा अध्यक्ष को कैग रिपोर्ट पेश करने के लिए सदन की बैठक बुलाने का निर्देश देने का अनुरोध किया था.
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