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फडणवीस का क्या किया जाए? महाराष्ट्र चुनाव से पहले असमंजस में बीजेपी

सूत्रों के मुताबिक, शिव सेना नेता और सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी 288 में से 40 सीटों पर भी जीतती है तो भी वह फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे.

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India Daily Live

Maharashtra Elections: महाराष्ट्र में इस साल के अंत में होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा एक गंभीर मसले से जूझ रही है और वो मसला है देवेंद्र फडणवीस का. पार्टी इस प्रश्न का हल तलाशने में जुटी है कि देवेंद्र फडणवीस का अब क्या किया जाए?

राज्य में बीजेपी का सबसे लोकप्रिय चेहरा

कुछ लोगों का मानना है कि फडणवीस राज्य में बीजेपी का सबसे लोकप्रिय चेहरा हैं, युवा उनके साथ हैं, उन्होंने रिजल्ट दिया है, आरएसएस को उन पर भरोसा है और वो पीएम मोदी के चहेते भी हैं. हालांकि 2019 के विधानसभा चुनाव में पूर्ण बहुमत न मिलने के बाद उनकी छवि कुछ धूमिल हुई है. इसके पीछे उनके द्वारा लिए गए कुछ फैसलों को जिम्मेदार ठहराया गया. इसके अलावा हाल ही के लोकसभा चुनाव में महाराष्ट्र में बीजेपी की सीटें 23 से घटकर 9 रह गई, इससे भी उनकी साख को धक्का लगा. उनके समर्थक उनकी वर्तमान स्थिति के लिए केंद्रीय बीजेपी को जिम्मेदार मानते हैं जिसने उन्हें सीएम पद देने से मना कर दिया और दिया और उन्हें डिप्टी सीएम बना दिया.

दिल्ली या महाराष्ट्र

हालांकि महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव से पहले एक बार फिर से बीजेपी में इस बात की चर्चा शुरू हो गई है कि फडणवीस को दिल्ली लाया जाए और पार्टी का अध्यक्ष बनाया जाए. सूत्रों के मुताबिक, आरएसएस की तरफ से ऐसी मांग उठ रही है, क्योंकि उन्हें उम्मीद है कि अगर महायुति फिर से चुनाव जीतती है तो फडणवीस सीएम पद से वंचित रह सकते हैं.

सीएम बनने पर अड़े शिंदे

सूत्रों के मुताबिक, शिव सेना नेता और सीएम एकनाथ शिंदे ने कहा है कि अगर उनकी पार्टी 288 में से 40 सीटों पर भी जीतती है तो भी वह फिर से मुख्यमंत्री बनेंगे. वहीं दूसरे पक्ष का तर्क है महाराष्ट्र चुनाव से पहले फरणवीस को केंद्र में ले जाने से एक गलत संकेत जाएगा क्योंकि पूरे राज्य में उनकी स्वीकार्यता है. साथ ही महाराष्ट्र चुनाव में बीजेपी के खिलाफ परिणाम जाने पर उनके विरोधी उन्हें ही इसके लिए जिम्मेदार ठहरा सकते हैं.

संयोग से आरएसएस के सह सरकार्यवाह अतुल लिमये को संघ की ओर से महाराष्ट्र चुनाव के लिए संयोजक नियुक्त किया गया है. उन्होंने राज्य इकाई को किसी एक चेहरे के बजाय सामूहिक नेतृत्व में चुनाव लड़ने की सलाह दी है. हालांकि कुछ नेताओं का मानना है कि लोकसभा चुनाव में उम्मीदवारों के चयन में फडणवीस की भूमिका रही और इसलिए हार का ठीकरा भी उन्हीं पर फोड़ा जाना चाहिए.

नेताओं का यह समूह फडणवीस पर राज्य बीजेपी नेताओं को किनारे करने का भी आरोप लगाया है. एकनाथ खडसे इस बात से नाराज होकर एनसीपी में शामिल हो गए थे. दरकिनार किए जाने को लेकर पंकजा मुंडे ने कई बार नाराजगी जाहिर की थी, वहीं पूर्व सांसद पूनम महाजन को भी लोकसभा का टिकट नहीं दिया गया था.

मराठाओं में फडणवीस को लेकर नाराजगी

सूत्रों का कहना है कि मराठा कोटा आंदोलन के दौरान जब आंदोलनकारियों पर पुलिस ने लाठी भांजी थी तो मराठाओं ने इसके लिए ब्राह्मण समुदाय से आने वाले फडणवीस को ही जिम्मेदार माना था क्योंकि गृह विभाग उन्हीं के पास है. ऐसे में पार्टी के सूत्र ने कहा, 'ऐसे में जब राज्य चुनाव में जा रहा है, एक ब्राह्मण को बीजेपी में शीर्ष स्थान देने से मराठा समुदाय में गलत संदेश जाएगा.'

 फडणवीस जैसा वफादार खोजना मुश्किल

पार्टी के अंदर यह भी एक सवाल है कि अगर फडणवीस केंद्र में जाते हैं तो महाराष्ट्र में उनका स्थान कौन लेगा?  सूत्र इस बात को मानते हैं कि बीजेपी के लिए महाराष्ट्र में फडणवीस जैसे वफादार को खोजना एक चुनौती होगी.

केंद्र में जाने के इच्छुक नहीं देवेंद्र

वहीं फडणवीस के करीबी नेता मानते हैं कि फडणवीस खुद महाराष्ट्र से जाने के इच्छुक नहीं हैं. राज्य भाजपा के एक नेता ने कहा, 'अगर वह केंद्र में जाते हैं तो फिर वह राज्य में वापसी नहीं कर पाएंगे, जहां वह ज्यादा सुरक्षित महसूस करते हैं. उनके लिए दोबारा सीएम बनने का सपना फिर अधूरा रह जाएगा.'

आधुनिक भारत का अभिमन्यु
हालांकि फडणवीस से परिचित कुछ लोग उन्हें आधुनिक भारत का अभिमन्यु मानते हैं. जैसे महाभारत में अभिमन्यु को विरोधियों के घेरे में घुसने के बाद बाहर निकलने का रास्ता नहीं मिलता कमोबेश ऐसा ही हाल फडवीस का है, वह विरोधियों और शत्रुओं से घिरे हुए हैं, उनके अपने ही लोग उनके साथ नहीं हैं.