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Jagdeep Dhankhar Lawyer Role: उपराष्ट्रपति बनने से पहले सलमान के वकील थे जगदीप धनखड़! हाईप्रोफाइल काला हिरण केस में दिलाई थी जमानत

Jagdeep Dhankhar Lawyer Role: जगदीप धनखड़ ने 1998 में काला हिरण शिकार मामले में सलमान खान की ओर से अदालत में पैरवी की थी और उन्हें जमानत दिलाई थी. हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने वाले धनखड़ का यह एक कम जाना गया पहलू है. अदालत में उन्होंने पुलिस जांच पर सवाल उठाते हुए सलमान के सहयोग को जमानत का आधार बताया था.

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Km Jaya

Jagdeep Dhankhar Lawyer Role: जगदीप धनखड़ ने हाल ही में उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा दे दिया. अपने राजनीतिक जीवन से पहले धनखड़ एक वरिष्ठ वकील और संवैधानिक मामलों के विशेषज्ञ रहे हैं. वर्ष 1998 में चर्चित काला हिरण शिकार मामले में उन्होंने बॉलीवुड अभिनेता सलमान खान और अन्य सह-आरोपियों की ओर से अदालत में पैरवी की थी और उन्हें जमानत दिलाने में मदद की थी.

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक 1998 में राजस्थान के जोधपुर जिले के कांकाणी गांव में फिल्म ‘हम साथ-साथ हैं’ की शूटिंग के दौरान दो काले हिरणों के शिकार का मामला सामने आया. काला हिरण, भारत के वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत संरक्षित प्रजाति है. इस मामले में सलमान खान, सैफ अली खान, तब्बू, नीलम और सोनाली बेंद्रे सहित कई फिल्मी सितारों को आरोपी बनाया गया था.

सलमान खान की गिरफ्तारी

जब जोधपुर पुलिस ने सलमान खान को गिरफ्तार किया, तब धनखड़ पहले वकील थे जिन्होंने अदालत में जमानत की मांग की. उनके तत्कालीन सहायक प्रवीण बालवाड़ा ने बताया कि धनखड़ ने सलमान और अन्य आरोपियों को तुरंत जमानत दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. हालांकि बाद में केस के अन्य चरणों में वह शामिल नहीं रहे.

अदालत में धनखड़ की दलीलें

धनखड़ ने 1998 में दिए एक इंटरव्यू में इस केस पर बात करते हुए कहा था, "सेट पर 300 लोग थे, फिर किसी को घटना का पता क्यों नहीं चला?" उन्होंने पुलिस जांच की विश्वसनीयता पर भी सवाल उठाए थे. उन्होंने अदालत में तर्क दिया कि सलमान ने पुलिस के साथ पूरा सहयोग किया, इसलिए उन्हें जमानत मिलनी चाहिए. साथ ही, उन्होंने ग्रामीणों की शिकायत में हुई तीन सप्ताह की देरी को भी संदेहास्पद बताया.

बाद की कार्यवाही और सलमान की सजा

इस केस में वर्षों तक चली सुनवाई के बाद अप्रैल 2018 को सलमान खान को दोषी ठहराया गया और जोधपुर सेंट्रल जेल में दो रातें बिताईं. 7 अप्रैल 2018 को जिला एवं सत्र न्यायाधीश रवींद्र कुमार जोशी ने उन्हें 50,000 रुपये की निजी मुचलके और दो 25,000 रुपये के जमानतदारों के साथ जमानत दी. उन्हें कोर्ट की अनुमति के बिना देश छोड़ने की मनाही थी.

धनखड़ का राजनीतिक सफर

धनखड़ ने 2003 में भाजपा में प्रवेश किया, 2016 तक पार्टी के कानूनी मामलों के प्रमुख बने और 2019 में पश्चिम बंगाल के राज्यपाल नियुक्त किए गए. 2022 में उपराष्ट्रपति पद के लिए नामांकित हुए और निर्वाचित भी हुए. यह मामला उनके जीवन का एक अनछुआ अध्याय है, जिसमें वह राजनीति में आने से पहले एक अभिनेता के लिए वकील के रूप में खड़े रहे.