नई दिल्ली: भारत में कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं और सबसे चिंताजनक बात यह है कि अब यह बीमारी युवाओं को अपनी चपेट में ले रही है. हालिया रिपोर्ट्स के अनुसार, भारत की 20 प्रतिशत से अधिक युवा आबादी किसी न किसी रूप में कैंसर की शिकार है. विशेषज्ञों का मानना है कि इसका मुख्य कारण लोगों की बदलती और अनहेल्दी लाइफस्टाइल है.
कैंसर मुक्त भारत की एक स्टडी के अनुसार देश में 60 प्रतिशत पुरुष और 40 प्रतिशत महिलाएं कैंसर से जूझ रही हैं. इनमें से बड़ी संख्या 40 वर्ष से कम उम्र के लोगों की है. युवाओं में कैंसर के बढ़ते मामलों के पीछे खानपान की खराब आदतें, तनाव, प्रदूषण और फिजिकल एक्टिविटी की कमी को मुख्य कारण बताया जा रहा है.
शहरों की भागदौड़ भरी जिंदगी में लोगों के पास खुद के लिए समय नहीं है. गलत समय पर खाना, बाहर का तला-भुना और प्रोसेस्ड फूड खाना, देर रात तक जागना और नींद की कमी जैसी आदतें शरीर को कमजोर करती हैं. इसके चलते मोटापा, हाई बीपी और शुगर जैसी बीमारियां बढ़ रही हैं, जो आगे चलकर कैंसर का रूप ले लेती हैं.
कॉरपोरेट कल्चर और अनियमित दिनचर्या भी इस बीमारी के फैलाव में अहम भूमिका निभा रही है. ऑफिस में दिनभर स्क्रीन के सामने बैठकर काम करने से शरीर की फिजिकल एक्टिविटी खत्म हो जाती है. एक्सरसाइज और योग की कमी से मेटाबॉलिज्म घटता है और इम्यून सिस्टम कमजोर होता है. इससे शरीर कैंसर जैसी बीमारियों के प्रति संवेदनशील हो जाता है.
वहीं, भारत में बढ़ता प्रदूषण भी कैंसर का एक बड़ा कारण है. देश के कई शहरों में हवा और पानी में कार्सिनोजेनिक पदार्थ पाए जा रहे हैं. दिल्ली जैसे मेट्रो शहरों की हवा सांस के जरिए शरीर में ऐसे तत्व पहुंचा रही है जो कैंसर का खतरा बढ़ाते हैं. डॉक्टरों का कहना है कि लंबे समय तक ऐसे वातावरण में रहने से लंग, ब्रेस्ट और कोलन कैंसर के मामले बढ़ते हैं.
स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस स्थिति से बचने के लिए लोगों को अपनी जीवनशैली में बदलाव लाने की जरूरत है. नियमित एक्सरसाइज, संतुलित आहार, प्रदूषण से बचाव और तनाव मुक्त जीवन अपनाने से कैंसर के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकता है. सरकार और स्वास्थ्य संगठनों को भी युवाओं में हेल्दी लाइफस्टाइल के प्रति जागरूकता बढ़ाने की दिशा में कदम उठाने चाहिए.