Expiration Time Of Tea: भारत में चाय पीना केवल आदत नहीं, बल्कि जीवनशैली का हिस्सा है. सुबह की शुरुआत हो या शाम की थकान, एक कप गरम चाय हर किसी को ताजगी देती है लेकिन अक्सर ऐसा होता है कि बनाई गई चाय पूरी तरह खत्म नहीं होती और लोग सोचते हैं कि बाद में इसे गर्म कर फिर पी लेंगे. यह सामान्य-सी लगने वाली आदत वास्तव में स्वास्थ्य के लिए हानिकारक साबित हो सकती है.
विशेषज्ञों का कहना है कि दूध वाली चाय बहुत जल्दी खराब हो जाती है. सामान्य तापमान पर गर्मियों में यह केवल 2 से 3 घंटे के भीतर ही बैक्टीरिया का घर बन सकती है. ज्यादा देर तक रखने से इसके पोषक तत्व नष्ट हो जाते हैं. अगर इसे बार-बार गर्म किया जाए तो इसमें मौजूद टैनिन एसिडिक हो जाता है, जिससे गैस, एसिडिटी और पाचन संबंधी दिक्कतें बढ़ने लगती हैं.
दूसरी ओर, ब्लैक टी और ग्रीन टी की शेल्फ लाइफ थोड़ी ज्यादा होती है. इन्हें फ्रिज में रखने पर 6 से 8 घंटे तक सुरक्षित रखा जा सकता है. हालांकि जितनी देर तक यह रखी रहती हैं, उतना ही इनका स्वाद और एंटीऑक्सीडेंट गुण घटने लगता है. खराब चाय की पहचान करना भी जरूरी है. अगर चाय के स्वाद में खट्टापन या कड़वाहट आ जाए, उसमें अजीब-सी गंध आने लगे, परत जम जाए या रंग बदल जाए तो समझ लीजिए कि यह पीने योग्य नहीं है. ऐसी चाय पीने से गले में खराश, जलन और पाचन तंत्र पर बुरा असर पड़ सकता है.
विशेषज्ञ चेतावनी देते हैं कि पुरानी चाय का सेवन करने से न केवल एसिडिटी और गैस होती है, बल्कि गंभीर मामलों में फूड पॉइजनिंग तक हो सकती है. बार-बार गर्म की गई चाय में मौजूद पोषक तत्व और एंटीऑक्सीडेंट पूरी तरह नष्ट हो जाते हैं, जिससे शरीर को कोई लाभ नहीं मिलता. इसके अलावा यह गट हेल्थ पर भी असर डाल सकती है क्योंकि यह अच्छे बैक्टीरिया को कमजोर करती है.
स्वास्थ्य विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि चाय हमेशा ताजी बनाकर तुरंत पीनी चाहिए. अगर किसी कारण से चाय बच भी जाए तो उसे 1 से 2 घंटे के भीतर खत्म कर देना चाहिए. बार-बार गर्म करने से बचें और यदि आवश्यक हो तो इसे फ्रिज में रख सकते हैं, लेकिन 6 से 8 घंटे से ज्यादा सुरक्षित नहीं माना जाता.