Thug Life Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने कमल हासन की फिल्म 'ठग लाइफ' पर कर्नाटक में लगे प्रतिबंध की कड़ी आलोचना की है. कोर्ट ने कहा कि भीड़ को फिल्म की स्क्रीनिंग तय करने का अधिकार नहीं दिया जा सकता. इस मामले को सुप्रीम कोर्ट ने अपने पास स्थानांतरित कर लिया और कर्नाटक हाई कोर्ट की उस सलाह पर भी नाराजगी जताई, जिसमें अभिनेता से माफी मांगने को कहा गया था.
कर्नाटक में बैन हुई 'ठग लाइफ' तो सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार
यह विवाद तब शुरू हुआ जब कमल हासन ने एक प्रचार कार्यक्रम में कहा था कि कन्नड़ भाषा तमिल से उत्पन्न हुई है. इस बयान से कर्नाटक में कई संगठनों ने नाराजगी जताई और फिल्म पर प्रतिबंध की मांग की. कर्नाटक फिल्म चैंबर ऑफ कॉमर्स ने भी फिल्म की स्क्रीनिंग रोकने का फैसला किया और कमल हासन से माफी की मांग की. हालांकि कमल हासन ने स्पष्ट किया कि उनके बयान का गलत अर्थ निकाला गया और वह माफी नहीं मांगेंगे.
कर्नाटक सरकार से मांगा जवाब
इसके बाद बेंगलुरु के निवासी एम. महेश रेड्डी ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की, जिसमें फिल्म पर लगे "असंवैधानिक" प्रतिबंध को चुनौती दी गई. याचिका में कहा गया कि सेंट्रल बोर्ड ऑफ फिल्म सर्टिफिकेशन द्वारा प्रमाणित फिल्म को रोकना संविधान के अनुच्छेद 19(1)(a) (अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता) और 19(1)(g) (पेशे की स्वतंत्रता) का उल्लंघन है. सुप्रीम कोर्ट के जज प्राशांत कुमार मिश्रा और मनमोहन ने कर्नाटक सरकार से जवाब मांगा और मामले की सुनवाई 17 जून को की.
कर्नाटक हाई कोर्ट के रवैये पर उठाए सवाल
कोर्ट ने कर्नाटक हाई कोर्ट के रवैये पर सवाल उठाते हुए कहा कि यह गलत है कि फिल्म निर्माताओं को माफी मांगने के लिए मजबूर किया जाए. कोर्ट ने स्पष्ट किया कि कानून और व्यवस्था बनाए रखना राज्य सरकार का दायित्व है, न कि फिल्म निर्माताओं का. इस मामले ने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और सेंसरशिप के मुद्दों पर बहस छेड़ दी है. ठग लाइफ, जिसमें कमल हासन, सिलंबरासन, तृषा और अन्य सितारे हैं, 5 जून को देशभर में रिलीज हुई, लेकिन कर्नाटक में इसका प्रदर्शन नहीं हो सका.