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देवी मां जैसा मेकअप, प्राइवेट पार्ट पर क्रॉस का निशान, कौन है सिंगर टॉमी जेनेसिस? जिनपर लगा भगवान का अपमान करने का आरोप

कनाडाई रैपर और मॉडल टॉमी जेनेसिस, जिनका असली नाम जेनेसिस यास्मीन मोहनराज है, अपने नए म्यूजिक वीडियो 'ट्रू ब्लू' को लेकर सुर्खियों में हैं. भारतीय मूल की 34 साल की इस सिंगर को अपने बोल्ड और विवादास्पद अंदाज के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उनके वीडियो ने हिंदू और ईसाई समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.

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Who Is Tommy Genesis: कनाडाई रैपर और मॉडल टॉमी जेनेसिस, जिनका असली नाम जेनेसिस यास्मीन मोहनराज है, अपने नए म्यूजिक वीडियो 'ट्रू ब्लू' को लेकर सुर्खियों में हैं. भारतीय मूल की 34 साल की इस सिंगर को अपने बोल्ड और विवादास्पद अंदाज के लिए जाना जाता है, लेकिन इस बार उनके वीडियो ने हिंदू और ईसाई समुदायों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है.

देवी मां बनकर प्राइवेट पार्ट पर क्रॉस का निशान

'ट्रू ब्लू' वीडियो में टॉमी ने नीले रंग का बॉडी पेंट, लाल बिंदी, सोने के गहने और मांग टीका पहनकर हिंदू देवी मां काली जैसा रूप धारण किया है. इसके साथ ही उन्होंने ईसाई धर्म के पवित्र प्रतीक 'क्रॉस' का इस्तेमाल भी किया, जिसे कई लोगों ने अपमानजनक माना. वीडियो में टॉमी क्रॉस को अपने प्राइवेट पार्ट के पास रखती और उसे चाटती नजर आ रही हैं. इन दृश्यों की वजह से उन्हें सोशल मीडिया पर काफी आलोचना का सामना करना पड़ रहा है. 

कौन है सिंगर टॉमी जेनेसिस?

लोगों ने टॉमी पर धार्मिक भावनाओं को आहत करने और लोकप्रियता के लिए सस्ते हथकंडे अपनाने का आरोप लगाया. एक यूजर ने लिखा, "यह धार्मिक प्रतीकों का अपमान है, सिर्फ वायरल होने के लिए किया गया स्टंट." भारतीय रैपर रफ्तार ने भी इंस्टाग्राम पर वीडियो शेयर कर इसे अपने धर्म का मजाक बताया और इसे हटाने की मांग की.

भगवान का अपमान करने का लगा आरोप

टॉमी जेनेसिस का जन्म वैंकूवर, कनाडा में हुआ था और वे तमिल और स्वीडिश मूल की हैं. उनकी संगीत शैली में रैप और पॉप का मिश्रण होता है, जो अक्सर बोल्ड और बेबाक थीम्स पर आधारित होता है. वे एक विजुअल आर्टिस्ट भी हैं और अपने म्यूजिक वीडियो में अनोखे कॉन्सेप्ट लाने के लिए जानी जाती हैं. हालांकि यह पहली बार नहीं है जब टॉमी विवादों में आई हैं. पहले भी उनके गाने और परफॉर्मेंस ने ट्रोलिंग का सामना किया है. इस विवाद पर टॉमी की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है. सोशल मीडिया पर बहस जारी है, जहां कुछ लोग इसे क्रिएटिविटी का हिस्सा मान रहे हैं, तो कई इसे धार्मिक अपमान बता रहे हैं.