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सिर्फ 3 दिन लाल हो जाती है ब्रह्मपुत्र नदी, आखिर कामाख्या मंदिर में ऐसा क्या होता है जिसे देखकर लोग रह जाते हैं सन्न?

असम के गुवाहाटी स्थित कामाख्या मंदिर में हर साल अंबुबाची मेले के दौरान एक रहस्यमयी घटना देखने को मिलती है. इन तीन दिनों में ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल दिखाई देता है.

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Reepu Kumari

Kamakhya Temple: हमारे देश में कई मंदिर ऐसे हैं जहां कुछ ऐसा होता है जिसपर यकीन करना मुश्किल हो जाता है. वहां के रहस्य, किस्से कहानियों की चर्चा सदियों तक चलती है.असम के गुवाहाटी में स्थित कामाख्या मंदिर एक बार फिर अपनी रहस्यमयी परंपराओं को लेकर चर्चा में है. हर साल अंबुबाची मेले के दौरान यहां ऐसा दृश्य दिखाई देता है, जिसे देखकर श्रद्धालु ही नहीं, वैज्ञानिक भी हैरान रह जाते हैं. इन तीन दिनों में ब्रह्मपुत्र नदी का पानी लाल नजर आने लगता है. लोग इसे देवी की शक्ति और चमत्कार से जोड़कर देखते हैं.

नीलाचल पहाड़ियों पर बना यह मंदिर भारत के सबसे प्रसिद्ध शक्तिपीठों में गिना जाता है. यहां देवी की किसी मूर्ति की पूजा नहीं होती, बल्कि योनि आकार की शिला की आराधना की जाती है. यही वजह है कि यह मंदिर स्त्री शक्ति, सृजन और प्रकृति के चक्र का प्रतीक माना जाता है. अंबुबाची मेले के दौरान यहां लाखों श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ती है.

तीन दिनों तक बंद रहते हैं मंदिर के कपाट.

हर साल जून या जुलाई में अंबुबाची मेले के समय कामाख्या मंदिर के कपाट लगातार तीन दिनों तक बंद रखे जाते हैं. मान्यता है कि इन दिनों मां कामाख्या वार्षिक मासिक धर्म से गुजरती हैं और इसी कारण मंदिर को विश्राम दिया जाता है. इस दौरान मंदिर में कोई पूजा नहीं होती. चौथे दिन विशेष अनुष्ठान और स्नान के बाद कपाट खोले जाते हैं और श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरित किया जाता है.

जब नदी का रंग बदलता है तो बढ़ जाती है उत्सुकता.

अंबुबाची मेले के दौरान सबसे ज्यादा चर्चा ब्रह्मपुत्र नदी के लाल दिखाई देने वाले पानी की होती है. स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं का मानना है कि यह देवी के रजस्वला होने का प्रतीक है. यही कारण है कि इस घटना को देखने के लिए देशभर से लोग गुवाहाटी पहुंचते हैं. कई श्रद्धालु इसे चमत्कार मानते हैं और इसे देवी की दिव्य शक्ति का संकेत बताते हैं.

कामाख्या मंदिर की कहानी भी है बेहद अनोखी.

पौराणिक मान्यता के अनुसार माता सती ने अपने पिता राजा दक्ष के यज्ञ में अपमानित होकर अग्नि में कूदकर प्राण त्याग दिए थे. इसके बाद भगवान शिव सती के शरीर को लेकर तांडव करने लगे. तब भगवान विष्णु ने सुदर्शन चक्र से सती के शरीर के कई टुकड़े किए. जहां-जहां उनके अंग गिरे, वहां शक्तिपीठ बने. माना जाता है कि कामाख्या में माता सती का गर्भ और योनि भाग गिरा था.

यहां स्त्री शक्ति को मिलता है सम्मान

कामाख्या मंदिर की सबसे खास बात यह है कि यहां मासिक धर्म को अपवित्र नहीं माना जाता. जिस विषय पर समाज में अक्सर खुलकर बात नहीं होती, उसी को यहां देवी की शक्ति और सृजन का प्रतीक माना जाता है. मंदिर की गुफा में स्थित प्राकृतिक शिला सालभर जलधारा से नम रहती है. श्रद्धालु मानते हैं कि यहां पहुंचकर उन्हें एक अलग तरह की आध्यात्मिक ऊर्जा महसूस होती है.

विज्ञान भी खोज रहा है इस रहस्य का जवाब

ब्रह्मपुत्र नदी के लाल होने को लेकर वैज्ञानिकों की अलग राय है. कुछ विशेषज्ञ मानते हैं कि आसपास की पहाड़ियों में मौजूद लाल खनिज बारिश के पानी के साथ नदी में मिल जाते हैं. वहीं कुछ लोग विशेष शैवाल या धार्मिक अनुष्ठानों में इस्तेमाल होने वाले सिंदूर को इसकी वजह बताते हैं. हालांकि अब तक कोई एक स्पष्ट कारण सामने नहीं आया है. यही रहस्य इस परंपरा को और भी दिलचस्प बना देता है.

Disclaimer: यहां दी गई सभी जानकारी सामान्य मान्यताओं और जानकारियों पर आधारित है.  theindiadaily.com इन जानकारियों की पुष्टि नहीं करता है. किसी भी जानकारी को अमल में लाने से पहले संबंधित विशेषज्ञ से सलाह ले लें.