कोलकाता: पांच राज्यों में हुए चुनाव के नतीजों का रुझान आना शुरू हो गया है. इन पांचों राज्यों में भी सबसे ज्यादा चर्चा पश्चिम बंगाल की हो रही है, जहां बीजेपी ने सत्तारूढ टीएमसी को रुझानों में बड़ी पटखनी दी. टीएमसी मतगणना की शुरूआत से ही चारों खाने चित है और बीजेपी की सरकार बनना लगभग तय हो चुका है. इधर बीजेपी ऐतिहासिक जीत की तरफ बढ़ रही तो वहीं एक ओर पार्टी के वादों की भी चर्चा शुरू हो गई है.
अपने इलेक्शन कैंपेन के दौरान बीजेपी ने बंगाल की जनता से कई वादे किए थे, जिनमें महिलाओं को मासिक आर्थिक सहायता देना अहम था. दरअसल बीजेपी ने अपने संकल्प पत्र में बंगाल में महिलाओं को 3000 रुपये मासिक आर्थिक सहायता देने का वादा किया है. जिसको लेकर ये सवाल उठाए जा रहे हैं कि क्या बीजेपी अपने इस वादे को पूरा कर पाएगी.
दरअसल इन सवालों का उठना निराधार नहीं है, क्योंकि बीजेपी ने इससे पहले भी दिल्ली की जनता से वादे किए थे, जिन्हें अब तक पूरा नहीं किया गया है. बीजेपी ने दिल्ली विधानसभा चुनाव में भी अपने संकल्प पत्र में वादा किया था कि जीत के बाद महिलाओं को 2500 रुपये प्रति महीने आर्थिक सहायता दी जाएगी.
लेकिन बीजेपी की सरकार बनने के एक साल बाद एक भी महिला को इसका लाभ नहीं मिला है. आईटीआर में पता चला है कि 'महिला समृद्धि योजना' जिसके तहत ये राशि दी जानी थी, उसके लिए राशि तो आबंटित हुई है लेकिन एक भी महिला को अब तक एक रुपये का भी भुगतान नहीं हुआ है.
दिल्ली में तो अब तक वादों को पूरा नहीं किया गया है. इसी को आधार मानकर बंगाल में बीजेपी के संकल्प पत्र की चर्चा हो रही है. साथ ही यह सवाल उठ रहे हैं कि कैसे बीजेपी बंगाल में अपने वादों को पूरा कर पाएगी. विशेषज्ञों की इसपर मिली जुली राय है. कई एक्सपर्ट मान रहे हैं कि चुनाव से पहले किए गए चुनावी वादों को पूरा करना किसी भी पार्टी के लिए चुनौती होती है, जो बीजेपी के सामने भी रहेगी. अब देखना यह होगा कि बीजेपी अपने वादों को पूरा करती है, और करेगी तो इसमें कितना समय लगेगा. साथ ही इसमें कितना चुनौतियां होंगी.