Viral News: सोशल मीडिया पर एक इंटरव्यू छाया हुआ है, जिसमें कई युवाओं से देश के राष्ट्रपिता का नाम पूछा जाता है, लेकिन वे जवाब देने में असमर्थ साबित होते हैं. कुछ यूथ्स ऐसे भी होते हैं, जो नरेंद्र मोदी से लेकर सरदार पटेल और अम्बेडकर का नाम तक ले रहे हैं. यानी मन में जिसका नाम आया, बता दे रहे हैं. सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स यूजर अशोक कुमार पांडे की ओर से शेयर किए गए इस वीडियो ने कई सोशल मीडिया यूजर्स को हैरान और नाराज कर दिया है.
वीडियो में दिख रहा है कि 'राष्ट्रपिता' का सवाल कई यूथ्स को उलझन में डाल देता है. एक लड़की पूरे कॉन्फिडेंस से जवाब देते हुए देश के राष्ट्रपिता का नाम सरदार वल्लभभाई पटेल बताती है. एक अन्य लड़की कुछ देर अनुमान लगाती है, फिर कहती है, नरेंद्र मोदी. फिर खुद ही कहती है कि नहीं... नहीं. आइडिया ही नहीं है.
पहला तो यह कि सिर्फ़ अंग्रेज़ी बोलने का मतलब यह क़तई नहीं कि कुछ ज्ञान भी है, दूसरा इनके स्कूलों और शिक्षकों पर बाक़ायदा जाँच बिठाई जानी चाहिए। pic.twitter.com/mNnIUA0Mka
— Ashok Kumar Pandey अशोक اشوک (@Ashok_Kashmir) July 11, 2024Also Read
एक लड़के से जब देश के राष्ट्रपिता कौन हैं, पूछा जाता है, तो वो थोड़ी देर सोचकर कहता है, अम्बेडकर. एक और लड़की से जब पूछा जाता है, तो वो जवाब में कहती है कि मुझे इसका जवाब पता है. मैं सोच भी पा रही हूं, दिमाग में पिक्चर है, लेकिन नाम याद नहीं आ रहा है. आखिर में लड़की तपाक से बोलती है... गुजरात... दिल्ली.
वीडियो क्लिप को एक्स पर शेयर करते हुए सोशल मीडिया यूजर अशोक पांडे ने लिखा- सबसे पहले, केवल अंग्रेजी बोलने का मतलब यह नहीं है कि किसी को कुछ ज्ञान है; दूसरी बात, उनके स्कूलों और शिक्षकों का उचित निरीक्षण होना चाहिए.
ये वीडियो 11 जुलाई को शेयर किया गया था और तब से इसे 65,000 से ज़्यादा बार देखा जा चुका है और इस पर ढेरों कमेंट्स भी आ चुके हैं. सोशल मीडिया यूज़र्स ने युवाओं की अज्ञानता पर खुलकर अपनी निराशा व्यक्त की है.
एक यूजर ने कमेंट कर लिखा कि लगता है ये बच्चे सरकारी स्कूल में नहीं पढ़े हैं, तब तो इन्हें पता होना चाहिए था, क्योंकि ऊंची फीस वाले अंग्रेजी मीडियम स्कूल बहुत अच्छी शिक्षा देते हैं, बेकार तो सरकारी स्कूल के बच्चे और शिक्षक ही हैं. एक अन्य यूजर ने सवाल किया, “क्या ये किसी स्कूल गए हैं???”
महात्मा गांधी को भारत की स्वतंत्रता की लड़ाई में उनकी महत्वपूर्ण भूमिका और भारत के लोगों पर उनके गहरे प्रभाव के कारण 'राष्ट्रपिता' के रूप में जाना जाता है. ये उपाधि उन्हें पहली बार नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने 1944 में सिंगापुर से रेडियो संबोधन के दौरान दी थी. अपने वैचारिक मतभेदों के बावजूद, बोस ने गांधी के फिलॉसफी का सम्मान किया और भारतीय राष्ट्रीय सेना के लिए समर्थन के लिए उनसे संपर्क किया. प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने भी महात्मा गांधी की हत्या के बाद अपने भाषण में इस उपाधि का इस्तेमाल किया था.