क्या है 30 सालों में एक बार खिलने वाला 'सिक्किम सुंदरी' फूल, जिसकी तारीफ करते नहीं थक रहे आनंद महिंद्रा, शेयर किया वीडियो
Sikkim Sundari, एक दुर्लभ हिमालयी फूल, 30 साल बाद खिलता है. इसकी अनोखी संरचना और कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने की क्षमता इसे प्राकृतिक सुंदरता और धैर्य का प्रतीक बनाती है.
हिमालय की ऊंचाइयों में पाया जाने वाला दुर्लभ पौधा सिक्किम सुंदरी या Rheum nobile प्रकृति की अद्भुत कृति है. यह पौधा 30 साल तक छोटे रोसेट के रूप में जीवित रहता है और केवल एक बार फूल खिलाता है.
महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा ने इस पौधे की अनोखी जीवनशैली और धैर्य की सराहना की है. उन्होंने स्कूल के बायोलॉजी पाठ्यक्रमों में इस जैसी स्थानीय प्रजातियों की कमी पर भी सवाल उठाया.
हिमालय का धैर्यशील पौधा
सिक्किम सुंदरी अपने जीवन का अधिकांश समय छोटे रोसेट के रूप में बिताता है, ऊर्जा संग्रहित करता है और कठोर परिस्थितियों में जीवित रहता है. ठंड, उच्च यूवी किरणें और पतली मिट्टी के बावजूद यह पौधा धीरे-धीरे अपनी जड़ों और पत्तियों के माध्यम से जीवन बनाए रखता है. तीस सालों के बाद, यह एक ही बार में लगभग दो मीटर ऊंचाई तक बढ़कर फूल देता है.
'ग्लासहाउस प्लांट' की अनोखी संरचना
इस पौधे को 'Glasshouse Plant' भी कहा जाता है. इसके पारदर्शी, भूरे रंग के ब्रेक्ट्स गुलाबी किनारों के साथ एक शंकु आकार की संरचना बनाते हैं. ये प्राकृतिक ग्रीनहाउस की तरह कार्य करते हैं, सूर्य की रोशनी को अंदर आने देते हैं और फूलों को ठंडी हवाओं और तेज UV किरणों से बचाते हैं. इस संरचना से पौधे के भीतर एक गर्म माइक्रो-क्लाइमेट बनता है.
सांस्कृतिक और औषधीय महत्व
स्थानीय रूप से इसे चूका कहा जाता है. इसके एसिडिक तने खाने योग्य हैं और पारंपरिक व्यंजनों में उपयोग किए जाते हैं. इसके पीले रंग की जड़ें 3 से 7 फीट लंबी हो सकती हैं और पारंपरिक तिब्बती चिकित्सा में उपयोग होती हैं. जून और जुलाई के बीच यह फूल खिलता है और बीज फैलाने के बाद पौधा अपनी जीवन यात्रा पूरी करता है.
प्राकृतिक धैर्य और प्रेरणा
आनंद महिंद्रा ने इस पौधे को प्रकृति का धैर्य का उदाहरण बताया. उन्होंने कहा कि यह पौधा न केवल जीवित रहने की अद्भुत क्षमता रखता है बल्कि कठिन परिस्थितियों में उद्देश्यपूर्ण वृद्धि का प्रतीक भी है. उनकी पोस्ट ने लोगों को स्थानीय जैव विविधता के महत्व और हिमालय की अनमोल प्रजातियों को समझने के लिए प्रेरित किया.
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शिक्षा और जागरूकता की आवश्यकता
महिंद्रा ने सवाल उठाया कि भारतीय स्कूलों में ऐसी स्थानीय अद्भुत प्रजातियों का उल्लेख क्यों नहीं होता. उन्होंने लोगों को सिखाया कि हमें अपने आस-पास की जैव विविधता को समझना और संरक्षित करना चाहिए. Sikkim Sundari जैसी प्रजातियां हमें धैर्य, सहनशीलता और प्रकृति की अनोखी खूबसूरती की सीख देती हैं.
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