आधी रात को बाइक सवार को ले जाने के लिए तेंदुआ बनकर आया ‘यमराज’, वीडियो में देखें कैसे शख्स ने मौत को दी मात

आंध्र प्रदेश के तिरुपति में एक हैरान करने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है. तिरुमाला की तलहटी में रात के समय एक तेंदुए ने दोपहिया वाहन पर सवार लोगों पर हमला करने की कोशिश की.

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Garima Singh

Leopard attack on Bike in Tirupati: आंध्र प्रदेश के तिरुपति में एक हैरान करने वाली घटना ने लोगों का ध्यान खींचा है. तिरुमाला की तलहटी में रात के समय एक तेंदुए ने दोपहिया वाहन पर सवार लोगों पर हमला करने की कोशिश की. यह दिल दहला देने वाला मंजर एक कार के डैशकैम में कैद हो गया, और अब यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है.

वायरल वीडियो में दिखाई देता है कि रात के समय एक बाइक पर सवार दो लोग उस वक्त खतरे में पड़ गए, जब जंगल से अचानक एक तेंदुआ सड़क पर कूद पड़ा और उन पर झपटा. बाइक की तेज रफ्तार ने सवारों को तेंदुए के पंजों से बचा लिया. वीडियो में साफ देखा जा सकता है कि तेंदुआ बाइक की ओर दौड़ता है, लेकिन सवार ने गजब का संतुलन बनाए रखा और हादसे को टाल दिया. खबरों के अनुसार, यह घटना अलीपिरी से चेरलोपल्ली के रास्ते में हुई.

तेंदुए की नाकामी, जंगल में वापसी

अपने शिकार को पकड़ने में असफल होने के बाद, तेंदुआ निराश होकर जंगल की ओर लौट गया. यह दृश्य देखने वालों के लिए किसी थ्रिलर फिल्म से कम नहीं था. स्थानीय लोगों का कहना है कि तिरुपति के जंगली इलाकों में तेंदुओं का सड़कों पर आना असामान्य नहीं है. भोजन की तलाश में ये जंगली जानवर अक्सर सड़कों के किनारे दिखाई देते हैं.

अलीपिरी में पहले भी तेंदुए का आतंक

यह पहली बार नहीं है जब तिरुपति में तेंदुए से जुड़ी घटना सामने आई हो. इस साल मार्च में, अलीपिरी वॉकवे के पास एक तेंदुआ देखा गया था. द न्यूज़ मिनट की रिपोर्ट के अनुसार, गलीगुपुरम के पास यह तेंदुआ एक दुकान के सीसीटीवी कैमरे में कैद हुआ था. इसके अलावा, इस घटना से दो सप्ताह पहले मुग्गू बावी के पास पैदल मार्ग पर भी एक तेंदुआ देखा गया था.

तिरुमाला का पैदल मार्ग: श्रद्धा और खतरे का संगम

तिरुमाला पहाड़ियों पर स्थित श्री वेंकटेश्वर मंदिर तक पहुंचने के लिए श्रद्धालु प्रतिदिन अलीपिरी पैदल मार्ग का उपयोग करते हैं. यह 9 किलोमीटर लंबा मार्ग 3,500 से अधिक सीढ़ियों वाला है. हालांकि, तेंदुओं की मौजूदगी इस मार्ग को खतरनाक बनाती है. स्थानीय प्रशासन और वन विभाग को ऐसी घटनाओं को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की जरूरत है.