Kullu Dussehra Controversy: हिमाचल प्रदेश के कुल्लू दशहरा उत्सव के पहले दिन गुरुवार को एक चौंकाने वाली घटना सामने आई. यहां देवता भृगु ऋषि के शिविर में पहुंचे तहसीलदार हरि सिंह यादव की भीड़ ने पिटाई कर दी. विवाद उस समय भड़क गया जब तहसीलदार जूतों के साथ शिविर में दाखिल हुए. देव परंपरा के अनुसार शिविर में जूते पहनकर प्रवेश करना अनादर माना जाता है. इस बात को लेकर देवता के अनुयायी भड़क उठे और उन्होंने तहसीलदार को कॉलर से पकड़कर खदेड़ते हुए बाहर निकाला. इस दौरान उनके कपड़े भी फट गए और धक्का-मुक्की होती रही.
मौके पर मौजूद लोगों ने आरोप लगाया कि तहसीलदार ने शिविर में देव समाज को धौंस दिखाने की कोशिश की और यहां तक कह दिया कि अगले वर्ष दशहरा उत्सव में देवता को निमंत्रण नहीं दिया जाएगा. इस कथन ने अनुयायियों का गुस्सा और भड़का दिया. ग्राम पंचायत रतोचा के उपप्रधान और देवता भृगु ऋषि के कारकून रिंकु शाह ने बताया कि पिछले साल भी तहसीलदार जूतों के साथ शिविर में घुसे थे, जिसके बाद शुद्धिकरण करना पड़ा था.
घटना के वीडियो भी सामने आए हैं जिनमें तहसीलदार को कॉलर से पकड़कर ले जाते हुए और धक्का-मुक्की होती साफ दिखाई दे रही है. इस दौरान तहसीलदार ने फोन मिलाने की कोशिश भी की, लेकिन अफरा-तफरी में बातचीत नहीं हो पाई. विवाद के बाद हालात इतने बिगड़े कि तहसीलदार को अंततः देवता के सामने नाक रगड़कर माफी मांगनी पड़ी. हालांकि, इस मामले पर अब तक पुलिस को कोई औपचारिक शिकायत नहीं दी गई है.
ये साहब कुल्लू के तहसीलदार हैं, इन्होंने देवता के बारे में कुछ अपशब्द कहे, इसके बाद जनता का गुस्सा फूट पड़ा, और जनता इन्हें इनके ऑफिस खींच कर देवता के पास ले जा रही, माफी मंगवाने को, यह पूरे देश में होना चाहिए, कोई भी व्यक्ति देवताओं को गाली नहीं दे सकता pic.twitter.com/ERFAK15SOr
— Nitin Shukla 🇮🇳 (@nshuklain) October 3, 2025
इस घटना पर कुल्लू के बंजार से भाजपा विधायक सुरेंद्र शौरी ने तहसीलदार पर गंभीर आरोप लगाए और कहा कि 2023 में भी उन्होंने 18 देवी-देवताओं के तंबू उखाड़ दिए थे. शौरी ने दावा किया कि वह विधानसभा में उनके खिलाफ प्रिविलेज मोशन ला चुके हैं और कार्रवाई की प्रक्रिया चल रही है. उन्होंने कांग्रेस सरकार पर सवाल उठाते हुए पूछा कि आखिर ऐसे अधिकारी को कुल्लू में क्यों तैनात किया गया.
घटना के दौरान सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल उठ रहे हैं. दशहरा उत्सव में 1200 से अधिक पुलिसकर्मी तैनात थे, लेकिन मौके पर कोई नजर नहीं आया. यह भी चर्चा का विषय है कि जब अधिकारी पर भीड़ ने हाथ उठाया तो पुलिस ने हस्तक्षेप क्यों नहीं किया. फिलहाल, मामले में न तो पुलिस ने कोई केस दर्ज किया है और न ही प्रशासन की तरफ से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया दी गई है.