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Raveendran Byju: पद छोड़ने को तैयार नहीं Byju's के रवींद्रन, बोले- मायने नहीं रखता EGM का फैसला

शुक्रवार को हुई EGM में कंपनी के निवेशकों ने कंपनी के फाउंडर व सीईओ रवींद्रन बायजू, उनकी पत्नी दिव्या गोकुलनाथ और भाई रिजु रवींद्रन को बोर्ड से हटाने का प्रस्ताव पास किया था.

India Daily Live

Byjus Row: एडटेक कंपनी बायजूस के फाउंडर और सीईओ रवींद्रन बायजूस ने कहा है कि उन्हें कंपनी ने बाहर किए जाने की बात अफवाह है और वह कंपनी के सीईओ बने रहेंगे. खबरों की मानें तो उन्होंने कंपनी के कर्मचारियों को एक पत्र लिखकर ये बात ही है. रविंद्रन ने कर्मचारियों को लिए अपने पत्र में कहा, 'मैं आपको यह लेटर कंपनी के सीईओ के रूप में लिख रहा हूं. आपने मीडिया में जो पढ़ा है वह गलत है. मैं कंपनी का सीईओ बना रहूं और कंपनी का बोर्ड भी वही रहेगा.'

रवींद्रन ने आगे कहा कि कुछ चुनिंदा छोटे निवेशकों के एक समूह ने मिलकर ईजीएम में सर्वसम्मति से प्रस्ताव पास किया है, वह पूरी तरह गलत है. इस ईजीएम में 170 शेयरधारकों में से केवल 35 यानी लगभग 45% शेयरधारकों ने ही प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया, जो अपने आप में बताता है कि ज्यादातर शेयरधारक इस अप्रासंगिक बैठक में लाए गए प्रस्ताव के पक्ष में नहीं थे.

'आप सबकी सहमति के बिना बदलाव नहीं कर सकते'

उन्होंने कहा कि जिस तरह से आप सभी खिलाड़ियों की सहमति के बिना बीच खेल में नियमों को नहीं बदल सकते, ठीक वैसे ही कठोर दिशानिर्देशों का पालन किए बगैर आप कंपनी चलाने के तरीके में बदलाव नहीं कर सकते.

'EGM में हुआ नियमों का उल्लंघन'

बायजू रवींद्रन ने कहा कि एक्स्टाऑर्डिनरी जनरल मीटिंग (EGM) में कई आवश्यक नियमों का उल्लंघन हुआ, इसका मतलब ये है कि बैठक में जो भी फैसला हुआ वह मायने नहीं रखता.

हाईकोर्ट के आदेश का दिया हवाला

रवींद्रन ने कर्नाटक हाईकोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए कहा कि मीटिंग के दौरान जो भी फैसला लिया गया वह 13 मार्च को होने वाली अगली सुनवाई से पहले प्रभावी नहीं होगा.

क्या है पूरा मामला

बता दें कि शुक्रवार को हुई EGM में कंपनी के निवेशकों ने कंपनी के फाउंडर व सीईओ रवींद्रन बायजू, उनकी पत्नी दिव्या गोकुलनाथ और भाई रिजु रवींद्रन को बोर्ड से हटाने का प्रस्ताव पास किया था. सूत्रों के मुताबिक, निवेशकों ने रवींद्रन के सीईओ रहते कंपनी में होने वाली गड़बड़ियों के चलते उन्हें हटाने का फैसला किया है. ईजीएम में निवेशकों ने कंपनी की लीडरशिप में सुधार लाने, बोर्ड को दोबारा गठित करने, प्रशासन से जुड़े उल्लंघनों की फॉरेंसिक जांच शुरू करने ले लिए भी प्रस्ताव पारित किये थे.