ड्रिंक एंड ड्राइव में कटा 15000 का चालान तो लोक अदालत कितने की दे सकती है राहत? जानें क्या है नियम
लोक अदालत में शराब पीकर गाड़ी चलाने पर ₹15,000 का जुर्माना 20 से 50 प्रतिशत तक कम किया जा सकता है. आखिरी फैसला जज के फैसले और आरोपी के रिकॉर्ड पर निर्भर करता है.
नई दिल्ली: भारत में मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ड्राइविंग को लेकर कुछ नियम बनाए गए हैं, जिनका सभी को पालन करना होता है. नियमों के अनुसार ड्रिंक एंड ड्राइव के लिए चालान काटा जाता है. हालांकि लोगों के मन में अक्सर इसे लेकर कुछ सवाल होते हैं.
अगर पुलिस आपका चालान काटती है, तो आप लोक अदालत में उसे कम करवा सकते हैं. उदाहरण के लिए, अगर आपका 15,000 रुपये का ड्रिंक एंड ड्राइव चालान काटा जाता है, तो लोक अदालत में उसका कितना सेटलमेंट हो सकता है?
कितनी मिल सकती है छूट?
ऐसे में केस की गंभीरता और आपके पिछले रिकॉर्ड के आधार पर 20 से 50 परसेंट की छूट मिल सकती है. हालांकि आखिरी फैसला जज का होता है, जो तय करते हैं कि आपको कितनी राहत मिलनी चाहिए.
कितनी होती है सजा?
कानूनी तौर पर मोटर व्हीकल एक्ट 1988 के सेक्शन 185 में पहली बार अपराध करने पर ₹10,000 का जुर्माना और छह महीने तक की जेल का प्रावधान है. यह कानूनी ढांचा लोक अदालत में सुनवाई का आधार बनता है.
दूसरी बार गलती करने वालों को क्या मिलती है सजा?
अगर कोई व्यक्ति तीन साल के अंदर दूसरी बार शराब पीकर गाड़ी चलाते हुए पकड़ा जाता है, तो जुर्माना बढ़कर ₹15,000 हो जाता है. ऐसे मामलों को बार-बार किए गए अपराध माना जाता है, जिससे राहत मिलना और मुश्किल हो जाता है. जज पिछले रिकॉर्ड पर भी विचार करते हैं. उस हिसाब से भी उस व्यक्ति पर जुर्माना और सजा तय की जाती है.
क्या होता है लोक अदालत का मकसद?
लोक अदालत का मकसद पेंडिंग मामलों को जल्दी सुलझाना है. पहली बार के मामलों में अक्सर नरमी दिखाई जाती है. कई मामलों में, ₹15,000 या ₹10,000 के जुर्माने को घटाकर ₹5,000 से ₹8,000 के बीच के सेटलमेंट में बदल दिया जाता है.
हालांकि, यह कोई पक्का नियम नहीं है.सेटलमेंट के लिए आपको लोक अदालत में खुद मौजूद होना होगा, अपनी गलती माननी होगी और वादा करना होगा कि आप इसे दोबारा नहीं दोहराएंगे. आपका व्यवहार और जवाब जज के फैसले पर असर डालते हैं. गैरहाजिरी से राहत मिलने की संभावना कम हो जाती है.