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अब बिक ही जाएगा हल्दीराम, समझिए क्या है पूरी कहानी जिसके चलते टाटा और पेप्सी से नहीं हो पाई थी डील

Haldiram: हल्दीराम को खरीदने के लिए एक कंपनी आगे आई है. इससे पहले टाटा और पेप्सी की भी हल्दीराम को खरीदने के लिए बातचीत चली थी.

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Haldiram: हल्दीराम. ये एक ब्रांड का नाम नहीं बल्कि हर मिडिल क्लास हिंदुस्तानी के घर का नाम बन चुका है. देश के कोने-कोने में हल्दीराम अपनी उपस्थिति दर्ज करा चुका है. इसे खरीदने को लेकर एक बार फिर से बात चल चुकी है. टाटा और पेप्सी ने इसे खरीदने की कोशिश की थी लेकिन बात नहीं बन पाई थी. लेकिन अबकी बार मार्केट में एक नए प्लेयर की एंट्री हो चुकी है. ये प्लेयर हल्दीराम को खरीद पाएगा या नहीं ये भी अपने आप में एक सवाल बना हुआ है.

इस ब्रांड की शुरुआत साल 1937 में हुई थी.  इसकी शुरुआत बिशन अग्रवाल ने बीकानेर से की थी. उनकी मिठाई और नमकीन की दुकान थी. बीकानेर से शुरुआत करने के बाद वो दिल्ली आ गए थे.  

तीन परिवार चलाता है हल्दीराम

आज के समय में भले ही आपको हल्दीराम के सभी प्रोडक्ट हल्दीराम के नाम से मिल रहे हों लेकिन इसे तीन अलग-अलग लोग चला रहे हैं. हल्दीराम का पूरा व्यापार तीन लोगों में बंटा हुआ है.

टाटा और पेप्सी ने भी की थी खरीदने की कोशिश

हल्दीराम को खरीदने के लिए टाटा और पेप्सी ने बातचीत की थी लेकिन वैल्यूएशन ने पूरी बात ही बिगाड़ दी. अगर बात बन गई होती तो अब तक हल्दीराम या तो टाटा या फिर पेप्सी का हो चुका होता. हल्दीराम ने इस दौरान अपनी वैल्यूएशन 10 अरब डॉलर बताई थी. और इसी वैल्यूएशन के आधार पर वह खुद को बेचना चाहता था. लेकिन बात नहीं बन पाई.

इतने वैल्यूशन की मांग

अब जो नया प्लेयर मार्केट में हल्दीराम को खरीदने के लिए आया है उसने इसकी वैल्यूएशन 8.5 अरब डॉलर तक की आंकी है. ब्लैकस्टोन’ अबू धाबी इन्वेस्टमेंट अथॉरिटी और सिंगापुर के जीआईसी साथ मिलकर हल्दीराम में करीब 74 फीसदी हिस्सेदारी खरीदना चाहते हैं. अभी दोनों के बीच बातें चल रही हैं. हल्दीराम अगर बिकता है तो यह भारत में होने वाली अब तक की सबसे बड़ी डील होगी.

दिल्ली और नागपुर बिजनेस के विलय के बाद होगा नया निवेश

हल्दीराम का ऑपरेशन तीन अग्रवाल परिवार करते हैं. एक परिवार दिल्ली दूसरा नागपुर तो तीसरा कोलकाता. अगर हल्दीराम को ब्लैकस्टोन खरीदता है तो सबसे पहले नागपुर और दिल्ली के बिजनेस का आपस में विलय होगा. विलय के बाद ब्लैकस्टोन इसमें से लगभग 74 फीसदी की हिस्सेदारी खरीदेगी. हल्दीराम का दिल्ली बिजनेस मनोहर अग्रवाल और मधुसूदन अग्रवाल देखते हैं. जबकि, नागपुर का बिजनेस कमल कुमार शिवकिसन अग्रवाल देखते हैं.

नागपुर और दिल्ली बिजनेस का विलय होने के बाद नई कंपनी का नाम हल्दीराम स्नैक्स फूड प्राइवेट लिमिटेड हो जाएगा. इस डील में हल्दीराम का कोलकाता बिजनेस नहीं शामिल होगा. वहीं, विलय के बाद दिल्ली बिजनेस के पास 55 तो नागपुर परिवार के पास 45 फीसदी हिस्सेदारी आएगी.