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1.34 लाख मांग रहे शिक्षक, 1.12 लाख चाहते हैं पोस्टमैन! 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी, कैसे होती है तय?

आठवें वेतन आयोग को लेकर शिक्षक और पोस्टमैन संगठनों ने बड़ी मांगें रखी हैं. शिक्षकों ने एंट्री लेवल बेसिक सैलरी 1.34 लाख रुपये करने की मांग की है, जबकि पोस्टमैन 1.12 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं. फिटमेंट फैक्टर 3.83 और सालाना इंक्रीमेंट 6-7% करने की भी मांग है. सरकार इन मांगों पर अंतिम फैसला लेगी.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
1.34 लाख मांग रहे शिक्षक, 1.12 लाख चाहते हैं पोस्टमैन! 8वें वेतन आयोग में कितनी बढ़ेगी सैलरी, कैसे होती है तय?
Courtesy: grok

केंद्र सरकार द्वारा आठवें वेतन आयोग की घोषणा के बाद सरकारी कर्मचारियों में चर्चा तेज हो गई है. लाखों कर्मचारी अपनी तनख्वाह में कितनी बढ़ोतरी होगी, इसे लेकर उत्सुक हैं. शिक्षक और पोस्टमैन संगठनों ने सरकार को अपनी मांगें सौंपी हैं. शिक्षकों का कहना है कि उनकी एंट्री लेवल बेसिक सैलरी 1.34 लाख रुपये होनी चाहिए, जबकि पोस्टमैन 1.12 लाख रुपये की मांग कर रहे हैं. ये मांगें सिर्फ बेसिक पे तक सीमित नहीं हैं, बल्कि फिटमेंट फैक्टर और सालाना बढ़ोतरी को भी शामिल करती हैं. आइए समझते हैं कि पे कमीशन में सैलरी कैसे तय होती है और इस बार क्या उम्मीद की जा रही है.

शिक्षकों की प्रमुख मांगें

शिक्षक संगठनों ने आठवें वेतन आयोग के सामने कई अहम मांगें रखी हैं. उन्होंने लेवल-6 के एंट्री लेवल शिक्षकों की बेसिक सैलरी को 1,34,500 रुपये करने का प्रस्ताव दिया है. साथ ही लेवल-1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम वेतन 50,000 से 60,000 रुपये के बीच तय करने की बात कही गई है. शिक्षक फिटमेंट फैक्टर को 2.57 से बढ़ाकर 2.62 से 3.83 तक करने और सालाना इंक्रीमेंट को 3% से बढ़ाकर 6-7% करने की मांग कर रहे हैं. इन बदलावों से उनकी कुल सैलरी में अच्छा इजाफा हो सकता है.

पोस्टमैन संगठन की मांग

फेडरेशन ऑफ नेशनल पोस्टल ऑर्गेनाइजेशन (FNPO) ने पोस्टमैन और मेल गार्ड (लेवल-5) की बेसिक सैलरी 25,500 रुपये से बढ़ाकर 1.12 लाख रुपये करने की मांग की है. संगठन ने लेवल-1 कर्मचारियों के लिए न्यूनतम बेसिक पे 69,000 रुपये करने का भी प्रस्ताव रखा है. FNPO का कहना है कि महंगाई को देखते हुए मौजूदा सैलरी काफी कम है. उन्होंने सभी कर्मचारियों के लिए 3.83 फिटमेंट फैक्टर और सालाना इंक्रीमेंट 6% करने की मांग की है.

फिटमेंट फैक्टर कितना अहम है?

फिटमेंट फैक्टर वह गुणांक है जिससे पुरानी बेसिक सैलरी को गुणा करके नई बेसिक सैलरी तय की जाती है. सातवें वेतन आयोग में यह 2.57 था. अब कर्मचारी संगठन इसे 3.83 तक बढ़ाने की मांग कर रहे हैं. अगर यह मांग मानी गई तो कर्मचारियों और पेंशनर्स की सैलरी और पेंशन में काफी बढ़ोतरी हो सकती है. फिटमेंट फैक्टर जितना ज्यादा होगा, नई सैलरी उतनी ही अधिक होगी.

किस आधार पर तय होती है सैलरी

आठवें वेतन आयोग में सैलरी तय करने के लिए कई फैक्टरों को ध्यान में रखा जाता है. सबसे पहले पुरानी बेसिक पे को फिटमेंट फैक्टर से गुणा किया जाता है. फिर पे मैट्रिक्स के अनुसार नई सैलरी स्ट्रक्चर तैयार होता है. इसमें महंगाई भत्ता (DA), हाउस रेंट अलाउंस (HRA) और ट्रांसपोर्ट अलाउंस (TA) जैसे भत्ते जोड़े जाते हैं. सरकार महंगाई, कर्मचारियों की जिम्मेदारियों, आर्थिक स्थिति और अन्य पहलुओं को ध्यान में रखकर अंतिम फैसला लेती है.

इन फैक्टर्स से तय होती है सैलरी

पे कमीशन में मुख्य रूप से फिटमेंट फैक्टर, पे मैट्रिक्स और विभिन्न भत्ते अहम भूमिका निभाते हैं. फिटमेंट फैक्टर नई बेसिक पे तय करता है. पे मैट्रिक्स लेवल 1 से 18 तक की सैलरी की स्टेप्स देता है. इसके अलावा महंगाई भत्ता, हाउस रेंट अलाउंस और ट्रांसपोर्ट अलाउंस सैलरी को और बढ़ाते हैं. शिक्षक और पोस्टमैन संगठनों की मांगें इन सभी फैक्टर्स पर आधारित हैं, ताकि कर्मचारियों की आमदनी महंगाई के अनुरूप बढ़ सके. सरकार इन मांगों का अध्ययन कर अंतिम निर्णय लेगी.