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क्या BCCI से पंगा लेकर डूब गई BYJU'S? नहीं चुकाया था 158 करोड़ तो बोर्ड ने लिया ये बड़ा एक्शन

बायजू के लिए संकट कम होने का नाम ही नहीं ले रहा है. कंपनी आए दिन नए-नए झमेलों में फंसती जा रही है. अब नए विवाद में भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड की भी एंट्री हो गई है. दरअसल, कंपनी ने भारतीय क्रिकेट टीम को स्पॉन्सर किया था. लेकिन कंपनी ने BCCI को पूरे पैसे चुकते नहीं किया. इसे लेकर बीसीसीआई NCLT के पास पहुंचा. इस मामले में ट्रिब्यूनल बीसीसीआई के याचिका को स्वीकार करते हुए अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया है.

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India Daily Live

Byju: एक समय भारत की सबसे बड़ी एडटेक स्टार्टअप रही बायजू की साख अब खत्म हो चुकी है. नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (एनसीएलटी) ने भारतीय क्रिकेट कंट्रोल बोर्ड द्वारा दायर की गई दिवालियापन याचिका को स्वीकार कर लिया है. BCCI ने दावा किया है कि बायजू पर प्रयोजन शुल्क के रूप में 158 करोड़ रुपये बकाया हैं. जब बायजू भारतीय क्रिकेट टीम की स्पॉन्सरशिप थी तब उसकी वैल्यू लगभग $22 बिलियन डॉलर थी.

21 से अधिक देशों में काम करने वाली बायजू कोविड-19 महामारी के दौरान ऑनलाइन शिक्षा पाठ्यक्रम पेश करके लोकप्रिय हुई थी. कोविड के बाद कंपनी ने ऑफलाइन कोचिंग सेंटर भी खोले.

इतने दिन का बकाया है बाकी

2019 में भारतीय क्रिकेट टीम और बायजू के बीच स्पॉन्सरशिप की डील हुई थी. यह डील मार्च 2023 तक की थी लेकिन बायजू ने सिर्फ सितंबर 2022 तक का भुगतान किया था. लेकिन एडटेक कंपनी ने कथित तौर पर अक्टूबर 2022 से मार्च 2023 तक का भुगतान नहीं किया. कंपनी ने बोर्ड को 158 करोड़ रुपये नहीं दिए हैं. 

ट्रिब्यूनल ने लेनदारों की समिति के गठन तक बायजू के संचालन की देखरेख के लिए एक अंतरिम समाधान पेशेवर नियुक्त किया है. इसके साथ ही मौजूदा प्रबंधन को निलंबित कर दिया गया है और कंपनी की संपत्तियां जब्त कर ली गई हैं.

कंपनी बोली बातचीत से सुलझाना चाहती है मैटर

इस मुद्दे को लेकर बायजू ने कहा कि वह इस मामले को बीसीसीआई के साथ सौहार्दपूर्ण तरीके से मामले को निपटाना चाहता है. इसके साथ ही कंपनी ने एनसीएलटी के फैसले को उच्च न्यायालय में चुनौती देने की योजना बनाई है. एनसीएलटी के फैसले के बाद कंपनी की स्थिति और भी खराब हो गई है.

एनसीएलटी के इस फैसले से निवेशकों को भी बड़ा झटका लगा है. NCLT  की कार्यवाही के बाद, बायजूस का प्रबंधन लेनदारों की एक समिति द्वारा किया जाएगा. इसमें प्रबंधन और शेयरधारकों की कोई भूमिका नहीं होगी.