टिहरी झील की बदलने वाली है किस्मत, 1200 करोड़ की मेगा योजना से बनेगा पर्यटन का नया स्वर्ग
टिहरी झील को विश्वस्तरीय पर्यटन स्थल बनाने के लिए 1200 करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी योजना पर काम तेज हो गया है. परियोजना के तहत रिंग रोड, चार नए भारी वाहन पुल, रोपवे, योग केंद्र और पर्यटन सुविधाओं का विस्तार किया जाएगा.
उत्तराखंड की प्रसिद्ध टिहरी झील आने वाले वर्षों में देश ही नहीं बल्कि दुनिया के प्रमुख पर्यटन स्थलों में शामिल हो सकती है. राज्य सरकार और संबंधित विभागों ने टिहरी झील क्षेत्र को वैश्विक पर्यटन केंद्र के रूप में विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं. इसके लिए करीब 1200 करोड़ रुपये की व्यापक योजना तैयार की गई है, जिसके तहत क्षेत्र में पर्यटन और बुनियादी ढांचे का बड़े स्तर पर विकास किया जाएगा.
टिहरी झील बनेगी पर्यटन का नया केंद्र
टिहरी झील पहले से ही वाटर स्पोर्ट्स और एडवेंचर गतिविधियों के लिए पर्यटकों के बीच लोकप्रिय है. अब सरकार इस क्षेत्र की संभावनाओं को और अधिक विकसित करने की तैयारी कर रही है. योजना का मुख्य उद्देश्य झील के दोनों किनारों को बेहतर कनेक्टिविटी से जोड़ना और प्रतापनगर क्षेत्र को पर्यटन की नई पहचान देना है.
रिंग रोड परियोजना से सुधरेगी कनेक्टिविटी
परियोजना के तहत कोटी कॉलोनी से डोबरा चांठी तक रिंग रोड का निर्माण कार्य जारी है. वहीं डोबरा चांठी से मदननेगी होते हुए खांड पीपलडाली तक प्रस्तावित रिंग रोड का सर्वे भी तेजी से चल रहा है. इसके अलावा पीपलडाली से कोटी कॉलोनी तक एक और रिंग रोड प्रस्तावित की गई है. टिहरी झील क्षेत्र में पर्यटन और परिवहन को नई गति देने के लिए चार आधुनिक भारी वाहन पुल बनाए जाएंगे. इन पुलों के निर्माण के लिए डीपीआर और डिजाइन तैयार करने की प्रक्रिया शुरू हो चुकी है.
प्रस्तावित पुलों में शामिल हैं:
- डोबरा चांठी में 500 मीटर लंबा डबल लेन केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज.
- पीपलडाली में 450 मीटर लंबा तीन लेन केबल स्टे सस्पेंशन ब्रिज.
- कोटी कॉलोनी में 370 मीटर लंबा तीन लेन सस्पेंशन ब्रिज.
- हडगीखाला में 150 मीटर लंबा तीन लेन स्टील ट्रस ब्रिज.
पर्यटन सुविधाओं का भी होगा विस्तार
योजना के अंतर्गत केवल सड़क और पुल ही नहीं बल्कि कई अन्य पर्यटन सुविधाएं भी विकसित की जाएंगी. इनमें डोबरा ईको पार्क, पर्यटन सूचना केंद्र, योग और ध्यान केंद्र, मंदिरों का विकास, रोपवे का नवीनीकरण, ठोस अपशिष्ट प्रबंधन और वनीकरण जैसे कार्य शामिल हैं.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस परियोजना से स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. होटल, होमस्टे, एडवेंचर स्पोर्ट्स और पर्यटन से जुड़े अन्य व्यवसायों को भी बढ़ावा मिलेगा. इससे टिहरी और प्रतापनगर क्षेत्र की अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी.