अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर रविवार को पूरे देश के साथ-साथ बिहार में भी योग को लेकर उत्साह और जागरूकता देखने को मिली. राजधानी पटना सहित राज्य के विभिन्न जिलों में बड़े पैमाने पर योग कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों, विद्यार्थियों और आम लोगों ने भाग लिया. इसी दौरान बिहार सरकार की ओर से योग को लेकर एक महत्वपूर्ण घोषणा भी की गई, जो आने वाले समय में राज्य की शिक्षा व्यवस्था में बड़ा बदलाव ला सकती है.
पटना के कंकड़बाग स्थित पाटलिपुत्र खेल परिसर में आयोजित योग दिवस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी, स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार, सांसद ललन सिंह, पूर्व मंत्री मंगल पांडेय समेत कई प्रमुख नेताओं ने भाग लिया. कार्यक्रम के दौरान योग और स्वस्थ जीवनशैली के महत्व पर चर्चा की गई तथा लोगों को नियमित रूप से योग अपनाने के लिए प्रेरित किया गया.
इस अवसर पर बिहार के स्वास्थ्य मंत्री निशांत कुमार ने राज्य के स्कूलों और कॉलेजों में योग को बढ़ावा देने की आवश्यकता पर जोर दिया. उन्होंने कहा कि बच्चों और युवाओं के शारीरिक एवं मानसिक विकास के लिए योग बेहद उपयोगी है. इसी को ध्यान में रखते हुए उन्होंने मुख्यमंत्री से अनुरोध किया कि राज्य के सभी शैक्षणिक संस्थानों के पाठ्यक्रम में योग को शामिल किया जाए.
स्वास्थ्य मंत्री ने सुझाव दिया कि स्कूलों और कॉलेजों में प्रतिदिन या नियमित अंतराल पर लगभग आधे घंटे का योग एवं ध्यान कार्यक्रम आयोजित किया जाए. उन्होंने स्पष्ट किया कि यह कार्यक्रम पूरी तरह स्वैच्छिक हो सकता है और इसमें छात्रों पर किसी प्रकार का दबाव नहीं डाला जाएगा. इसका उद्देश्य केवल विद्यार्थियों को स्वस्थ जीवनशैली की ओर प्रेरित करना होगा.
स्वास्थ्य मंत्री के इस प्रस्ताव पर मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने सकारात्मक प्रतिक्रिया देते हुए बड़ा ऐलान किया. उन्होंने कहा कि राज्य सरकार स्कूलों और कॉलेजों में योग को पाठ्यक्रम का हिस्सा बनाने की दिशा में काम करेगी. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का लक्ष्य केवल शिक्षा प्रदान करना नहीं, बल्कि स्वस्थ और जागरूक समाज का निर्माण करना भी है. उन्होंने कहा कि यदि युवा पीढ़ी नियमित रूप से योग को अपने जीवन का हिस्सा बनाएगी तो उसका सकारात्मक प्रभाव स्वास्थ्य, मानसिक संतुलन और व्यक्तित्व विकास पर दिखाई देगा.