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14 फीट लंबे कोगरा ने भगवान शिव के शीतकालीन प्रवास स्थल को बनाया 'घर', तस्वीर देखकर नहीं होगा विश्नास!

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, किंग कोबरा ने क्षेत्र के जंगली इलाकों में अपना डेरा जमा लिया है. यह सांप फन फैलाकर धरती पर घूमता हुआ दिखाई दे रहा है, जो उसकी आक्रामकता का संकेत है. छोटे सांपों, चूहों और मानसून के दौरान सक्रिय होने वाले अन्य छोटे जीवों को यह अपना शिकार बना रहा है.

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Gyanendra Sharma

 KING COBRA SNAKE: उत्तराखंड के रुद्रप्रयाग जिले में स्थित ऊखीमठ के ओंकारेश्वर क्षेत्र, जो भगवान केदारनाथ का शीतकालीन गद्दीस्थल के रूप में प्रसिद्ध है, इन दिनों एक खतरनाक मेहमान की वजह से दहशत का शिकार हो गया है. यहां किंग कोबरा नामक विषैले सर्प का निर्भीक विचरण ग्रामीणों के लिए खतरे की घंटी बजा रहा है. मस्तोली गदेरे और आसपास के इलाकों में इस विशालकाय सांप की मौजूदगी ने न केवल वयस्कों को सतर्क कर दिया है, बल्कि स्कूल जाने वाले बच्चों को भी घर से बाहर निकलने में हिचक पैदा कर दी है. सोशल मीडिया पर इसका वीडियो तेजी से वायरल हो रहा है.

प्रत्यक्षदर्शियों के मुताबिक, किंग कोबरा ने क्षेत्र के जंगली इलाकों में अपना डेरा जमा लिया है. यह सांप फन फैलाकर धरती पर घूमता हुआ दिखाई दे रहा है, जो उसकी आक्रामकता का संकेत है. छोटे सांपों, चूहों और मानसून के दौरान सक्रिय होने वाले अन्य छोटे जीवों को यह अपना शिकार बना रहा है. कुछ ग्रामीणों ने साहस जुटाकर इसका वीडियो रिकॉर्ड किया, जिसमें सांप खुले में तफ्तीश करता नजर आ रहा है. यह वीडियो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर साझा होते ही हजारों व्यूज बटोर चुका है, और लोग इसे देखकर क्षेत्र की सुरक्षा पर सवाल उठा रहे हैं.

ओंकारेश्वर वार्ड के निवासी बताते हैं कि बरसात के मौसम में जंगलों से निकलकर सांप मैदानी इलाकों में घुस आते हैं, लेकिन इस बार किंग कोबरा का आकार और व्यवहार सामान्य से कहीं अधिक भयावह है. यह सांप दुनिया के सबसे लंबे विषैले सर्पों में से एक है, जिसकी लंबाई 5 मीटर तक हो सकती है. एक काटने से ही इंसान की जान पर बन सकती है, इसलिए ग्रामीण सावधानी बरतते हुए आवाजाही कर रहे हैं.

बच्चों की पढ़ाई पर संकट

इस घटना का सबसे ज्यादा असर क्षेत्र के शैक्षणिक संस्थानों पर पड़ा है. विभिन्न स्कूलों और कॉलेजों में पढ़ने वाले बच्चे डर के मारे घरों में कैद हो गए हैं. माता-पिता सुबह-सुबह बच्चों को स्कूल छोड़ने जाते हैं, लेकिन लौटते समय हर कदम पर सतर्क रहते हैं. हमारे गांव में रास्ते संकरे हैं, और जंगल से सटा होने के कारण सांपों का खतरा हमेशा बना रहता है, लेकिन यह किंग कोबरा देखकर तो रोंगटे खड़े हो जाते हैं, एक स्थानीय निवासी ने बताया. ग्रामीणों का कहना है कि वे रात में तो बाहर निकलते ही नहीं, और दिन में भी समूहों में चलने को मजबूर हैं.

वन विभाग की प्रतिक्रिया और सलाह

घटना की सूचना मिलते ही नगर पंचायत ऊखीमठ और वन विभाग की टीमों ने क्षेत्र का दौरा किया है. वन अधिकारियों ने ग्रामीणों को सर्प दंश से बचाव के उपाय बताए हैं, जैसे कि जूतों का उपयोग करना, लाठी से रास्ता टटोलना और सांप देखते ही शोर मचाकर भागना. विभाग ने ट्रैपिंग टीम तैनात करने की योजना बनाई है, ताकि सांप को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया जा सके. विशेषज्ञों का मानना है कि जलवायु परिवर्तन और जंगलों की कटाई के कारण ऐसे विषैले जीव मानवीय बस्तियों में घुस रहे हैं.