नई दिल्ली: उत्तराखंड के आस्था केंद्र केदारनाथ मंदिर के कपाट खुलने की तिथि घोषित होते ही श्रद्धालुओं में खुशी की लहर दौड़ गई है. 22 अप्रैल को सुबह 8 बजे वृष लग्न में बाबा केदार के दर्शन शुरू होंगे. यह निर्णय धार्मिक विधि-विधान के साथ ऊखीमठ स्थित शीतकालीन गद्दीस्थल में लिया गया. घोषणा के बाद यात्रा मार्गों, ठहरने की व्यवस्थाओं और पंजीकरण केंद्रों पर हलचल तेज हो गई है. मंदिर समिति और प्रशासन ने इस बार बेहतर प्रबंधन का भरोसा दिलाया है. श्रद्धालु अब अपनी यात्रा की तैयारी में जुट गए हैं.
गढ़वाल हिमालय की गोद में मंदाकिनी नदी के तट पर स्थित केदारनाथ धाम छोटा चार धामों में प्रमुख स्थान रखता है. मान्यता है कि इसका निर्माण पांडवों ने करवाया था. यह भगवान शिव को समर्पित 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक पवित्र तीर्थस्थल माना जाता है. हर वर्ष लाखों श्रद्धालु कठिन पर्वतीय मार्ग पार कर यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं.
भारी बर्फबारी के कारण सर्दियों में मंदिर के कपाट बंद कर दिए जाते हैं. इस दौरान भगवान की उत्सव मूर्ति को ऊखीमठ लाया जाता है, जहां पूरे शीतकाल में पूजा होती है. मौसम अनुकूल होने पर मूर्ति को पुनः केदारनाथ लाया जाता है और विधिपूर्वक कपाट खोले जाते हैं.
केदारनाथ पहुंचने के लिए निकटतम हवाई अड्डा देहरादून में है, जो गौरीकुंड से लगभग 255 किलोमीटर दूर है. हरिद्वार रेलवे स्टेशन से भी सड़क मार्ग द्वारा गौरीकुंड पहुंचा जा सकता है. वहां से श्रद्धालु पैदल या अन्य साधनों से मंदिर तक जाते हैं. सड़क मार्ग से भी निजी और सार्वजनिक वाहन उपलब्ध रहते हैं.
2026 में यात्रा पर कोई संख्या सीमा नहीं रहेगी, लेकिन सामान्य पंजीकरण अनिवार्य होगा. श्रद्धालु ऑनलाइन या निर्धारित काउंटरों से परमिट प्राप्त कर सकते हैं. यात्रा से पहले गुप्तकाशी और सोनप्रयाग के चिकित्सा केंद्रों से फिटनेस प्रमाणपत्र लेना जरूरी होगा. स्वस्थ पाए जाने पर ही दर्शन की अनुमति दी जाएगी.
इस वर्ष टी गंगाधर लिंग को मुख्य पुजारी नियुक्त किया गया है. मंदिर समिति ने सुरक्षा, स्वास्थ्य सुविधाओं और भीड़ प्रबंधन को लेकर विशेष तैयारियां शुरू कर दी हैं. प्रशासन का दावा है कि इस बार श्रद्धालुओं को सुगम और व्यवस्थित दर्शन का अनुभव मिलेगा.