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Uttarakhand School Name Change: उत्तराखंड में बदल जाएंगे सरकारी स्कूलों के नाम, सीएम धामी ने किया ऐलान

इसके अलावा 62 करोड़ रुपये की राशि राज्य की पेयजल योजनाओं के रखरखाव व सुधार हेतु स्वीकृत की गई है, ताकि शहरी और ग्रामीण इलाकों में साफ और सुरक्षित पानी लगातार मिलता रहे.

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Edited By: Reepu Kumari
Uttarakhand School Name Change: उत्तराखंड में बदल जाएंगे सरकारी स्कूलों के नाम, सीएम धामी ने किया ऐलान
Courtesy: ANI

Uttarakhand School Name Change: उत्तराखंड में अब सरकारी स्कूलों के नाम इतिहास रचने वाले स्वतंत्रता सेनानियों के नाम पर रखे जाएंगे. मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने राज्य के कई शैक्षणिक संस्थानों के नाम बदलने की मंजूरी दे दी है. यह कदम ना सिर्फ युवाओं को प्रेरणा देगा, बल्कि स्थानीय गौरव को भी सम्मानित करेगा. इसके साथ ही मुख्यमंत्री ने राज्यभर में पेयजल, सड़क, ब्रिज और पार्किंग जैसे आधारभूत ढांचे को मजबूती देने के लिए करोड़ों की योजनाओं को हरी झंडी दिखाई है.

राज्य सरकार की ओर से जारी प्रेस विज्ञप्ति के अनुसार, पौड़ी गढ़वाल, देहरादून और पिथौरागढ़ जिलों के सरकारी स्कूलों को अब शहीद भगत सिंह रावत, पंडित सैराम, कुंवर सिंह रावत और श्री माधो सिंह जंगपांगी जैसे स्वतंत्रता सेनानियों के नाम से जाना जाएगा.

पेयजल योजनाओं के लिए 62 करोड़ का बजट

इसके अलावा 62 करोड़ रुपये की राशि राज्य की पेयजल योजनाओं के रखरखाव व सुधार हेतु स्वीकृत की गई है, ताकि शहरी और ग्रामीण इलाकों में साफ और सुरक्षित पानी लगातार मिलता रहे.

विकास की नई रफ्तार: इन क्षेत्रों में आएगी क्रांति

मुख्यमंत्री ने चंपावत जिले के पाटी विकासखंड में एक मल्टीलेवल पार्किंग और बहुउद्देश्यीय भवन के निर्माण के लिए 11.04 करोड़ रुपये, अल्मोड़ा जिले के जागेश्वर क्षेत्र में चितई-पेटशाल-भेटाडगी सड़क को ऑल वेदर मोटर रोड में बदलने के लिए 4.66 करोड़ रुपये, और बाजपुर विधानसभा में लेवाड़ा नदी पर स्पैन ब्रिज व एप्रोच रोड के लिए 2.83 करोड़ रुपये की मंजूरी दी है.

रुद्रप्रयाग के उखीमठ में ओंकारेश्वर मंदिर के पास कार पार्किंग के लिए 1.16 करोड़ रुपये, उत्तरकाशी जिले के जनकीचट्टी के पास गंगनाई (गरम पानी) में टनल पार्किंग के डीपीआर निर्माण के लिए 3.18 लाख रुपये, और बाजपुर विधानसभा में एक और पुल निर्माण को भी स्वीकृति मिल चुकी है.

मुख्यमंत्री के इन फैसलों से साफ है कि उत्तराखंड सरकार स्थानीय पहचान, इतिहास और मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दे रही है. यह पहल राज्य के संतुलित और समावेशी विकास की दिशा में एक अहम कदम मानी जा रही है.

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