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‘ट्रेकिंग शूज खरीदे थे, माउंट एवरेस्ट चढ़ना चाहता था’, एंजेल चकमा के दोस्त ने आखिरी दिनों को याद किया

एंजेल की पर्सनैलिटी को याद करते हुए, अंकुर ने उसे एक शांत और मिलनसार इंसान बताया जिसके बड़े सपने थे. एंजेल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना चाहता था.

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Ashutosh Rai

उत्तराखंड : देहरादून में हुई एंजेल चकमा की मौत ने पूरे देश को शोक में डाल दिया. इसी बीच उनके एक दोस्त ने क्रूर नस्लवादी हमले में मारे गए एंजेल के आखिरी दिनों को याद किया. उन पलों को याद करते हुए दोस्त की आंखें भर आई. उसने एंजेल चकमा की चोटों, उसके आखिरी शब्दों और उसके सपनों के बारे में बताया.

अस्पताल से आया था फोन

एंजेल के दोस्त अंकुर अग्रवाल ने बताया कि जब हमला हुआ, तब वह कुछ दूरी पर था. उसे अस्पताल से फोन आया जिसमें बताया गया कि एंजेल पर हमला हुआ है. जब वह अस्पताल पहुंचा तो उसने एंजेल को बुरी तरह घायल पाया.

सिर में तेज दर्द की कर रहा था शिकायत

अंकुर ने कहा, "उसे पीठ में चाकू मारा गया था और सिर पर किसी नुकीली चीज से मारा गया था. बहुत ज़्यादा खून बह रहा था." उसने आगे बताया कि एंजेल बहुत दर्द में था और बार-बार सिर में तेज दर्द की शिकायत कर रहा था. डॉक्टरों ने बाद में परिवार और दोस्तों को बताया कि एंजेल को अंदरूनी ब्लीडिंग हुई थी.

अंकुर ने आगे बताया कि उन्होंने एंजेल से कई बार पूछा कि क्या वह हमलावरों को पहचानता है. उसने कहा, "उसने कहा कि उसने उन्हें पहली बार देखा था. एंजेल कभी झगड़ों में नहीं पड़ता था."

एंजेल की पर्सनैलिटी को किया याद

एंजेल की पर्सनैलिटी को याद करते हुए, अंकुर ने उसे एक शांत और मिलनसार इंसान बताया जिसके बड़े सपने थे. एंजेल माउंट एवरेस्ट पर चढ़ना चाहता था और उसे ट्रेकिंग से बहुत प्यार था. अंकुर ने कहा, "उसने ट्रेकिंग बूट्स ऑर्डर किए थे और मुझसे कहा था कि जब वह वापस आएगा, तो हम साथ में ट्रेकिंग पर जाएंगे."

'यहां से चले जाओ, चीनी'

मृतक छात्र एंजेल चकमा के छोटे भाई माइकल चकमा 21 साल के हैं. वह देहरादून स्थित उत्तरांचल यूनिवर्सिटी में बीए प्रथम वर्ष के छात्र हैं. नौ दिसंबर की घटना को याद करते हुए माइकल ने उन्हें बताया कि पहले उन दोनों को नस्लीय गालियां दी गई थीं. "उनसे कहा गया, 'यहां से चले जाओ, चीनी.' एंजेल अपने भाई को बचाने गया और तभी लड़ाई हुई."