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पीएफ, सिक लीव, इंश्योरेंस, ओवरटाइम...यूपी में आउटसोर्स कर्मचारियों की आईं मौज! समाज कल्याण विभाग को मिले निर्देश

उत्तर प्रदेश के समाज कल्याण विभाग में कार्यरत आउटसोर्स कर्मचारियों को अब भविष्य निधि (PF), बीमा, साप्ताहिक और चिकित्सीय अवकाश जैसे लाभ मिलेंगे. एक अप्रैल से शुरू हुए आउटसोर्स सेवा निगम के तहत इन कदमों का लक्ष्य बिचौलियों के शोषण को समाप्त कर श्रमिकों के अधिकारों की कानूनी रक्षा करना है.

ANI
Sagar Bhardwaj

उत्तर प्रदेश के श्रमिकों के लिए एक नया अध्याय शुरू हो रहा है. राज्य के समाज कल्याण विभाग में आउटसोर्स और कॉन्ट्रेक्ट के आधार पर काम करने वाले सैकड़ों कर्मचारियों के कामकाजी जीवन में बुनियादी बदलाव आने वाला है. मंत्री असीम अरुण के निर्देशों के बाद अब इन श्रमिकों को पीएफ, इंश्योरेंस और तय छुट्टियों जैसे मूलभूत अधिकार मिलेंगे. यह पहल श्रम कल्याण की दिशा में एक ठोस कदम मानी जा रही है.

लगातार सात दिन काम नहीं करेगा कर्मचारी

नए श्रम संहिता और आउटसोर्स सेवा निगम के गठन ने इन कर्मियों की कार्यशर्तों को एक स्पष्ट कानूनी आधार दिया है. अब किसी भी आउटसोर्स श्रमिक से लगातार सात दिन काम लेना कानूनन गलत होगा. छह दिन निरंतर कार्य के बाद एक दिन का सवैतनिक साप्ताहिक अवकाश देना अनिवार्य कर दिया गया है. काम के घंटे आठ से नौ तक निर्धारित किए गए हैं और इससे अधिक कार्य लेने पर ओवरटाइम भुगतान का प्रावधान है. इसका सीधा मतलब है कि काम की अवधि और आराम के दिन अब प्रबंधन की मर्जी पर नहीं, बल्कि कानून की सुरक्षा में होंगे.

अर्न्ड लीव के साथ साथ आकस्मिक लीव भी

इन श्रमिकों के लिए छुट्टियों का भी एक व्यवस्थित ढांचा तैयार किया गया है. प्रत्येक कर्मचारी को साल भर में दस दिन का आकस्मिक अवकाश (Casual leave) मिलेगा. छह महीने की सेवा पूरी करने के बाद पंद्रह दिन का चिकित्सीय अवकाश और प्रतिवर्ष पंद्रह दिन का अर्जित अवकाश (Earned Leave) भी दिया जाएगा, जिसे अगले साल तक जमा किया जा सकेगा. महिला कर्मचारियों को मातृत्व अवकाश दिए जाने के मौजूदा नियमों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित करने पर जोर दिया गया है. ये सभी प्रावधान श्रमिकों के जीवन में एक तरह की स्थिरता और सुरक्षा का एहसास लाएंगे.

पीएम के साथ-साथ बीमा का लाभ भी

कर्मचारियों की दीर्घकालिक वित्तीय सुरक्षा के लिए भविष्य निधि (PF) और समूह बीमा जैसे लाभ अनिवार्य कर दिए गए हैं. साथ ही, आउटसोर्स सेवा निगम के माध्यम से बिचौलियों के चंगुल से श्रमिकों को मुक्त कराने का प्रयास किया जा रहा है. इसके तहत मजदूरी की दरें भी स्पष्ट रूप से तय की गई हैं. अकुशल श्रमिकों के लिए न्यूनतम मजदूरी ग्यारह हजार रुपये मासिक और कुशल श्रमिकों के लिए तेरह हजार पांच सौ रुपये मासिक निर्धारित की गई है. यह कदम न केवल शोषण रोकेगा बल्कि श्रमिकों की क्रय शक्ति में भी वृद्धि करेगा.

मंत्री असीम अरुण ने अधिकारियों को दिए निर्देश

'श्रम संवाद-2026' कार्यक्रम में इस नई व्यवस्था की रूपरेखा सामने आई. इस मौके पर मंत्री असीम अरुण ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि हर महीने वेतन पर्ची देना और पंद्रह दिन के भीतर सभी आउटसोर्स कर्मियों को पहचान पत्र जारी करना सुनिश्चित किया जाए. समाज कल्याण राज्यमंत्री संजीव कुमार गोंड सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारियों ने भी इन नीतियों पर चर्चा की. इस पूरी प्रक्रिया का उद्देश्य सिर्फ नियम बनाना नहीं, बल्कि यह सुनिश्चित करना है कि नीतियां जमीन पर उतरें और हर श्रमिक तक उनका लाभ पहुंचे.