UP में फिर लौटेगी भीषण गर्मी, 45 जिलों में लू का अलर्ट; बांदा के रिकॉर्ड तापमान की होगी जांच
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर लौटने वाला है. मौसम विभाग ने 45 जिलों में लू चलने की चेतावनी जारी की है. वहीं, बांदा में 48 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज होने के बाद इसके कारणों की वैज्ञानिक जांच शुरू कर दी गई है.
उत्तर प्रदेश में एक बार फिर भीषण गर्मी का दौर लौटने की संभावना जताई गई है. मौसम विभाग के अनुसार प्रदेश में फिलहाल कोई प्रभावी मौसम तंत्र सक्रिय नहीं है, जिसके कारण आने वाले चार दिनों में तापमान में तेजी से वृद्धि हो सकती है.
मौसम विभाग की ओर से कई जिलों में लू चलने की आशंका है, जबकि कुछ क्षेत्रों में हल्की बूंदाबांदी या छिटपुट बारिश के भी आसार बने रहेंगे. मौसम विशेषज्ञों का कहना है कि गर्म हवाओं की रफ्तार 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक पहुंच सकती है, जिससे लोगों को अतिरिक्त सावधानी बरतने की आवश्यकता होगी.
इन जिलों में रहेगी गर्मी
मौसम विभाग के पूर्वानुमान के मुताबिक शुक्रवार को प्रदेश के करीब 45 जिलों में अधिकतम तापमान में बढ़ोतरी दर्ज की जा सकती है. बांदा, चित्रकूट, कौशांबी, प्रयागराज, फतेहपुर, प्रतापगढ़, गाजीपुर, आजमगढ़, जौनपुर, रायबरेली, अमेठी, सुलतानपुर और अयोध्या सहित कई जिलों में लू चलने की संभावना व्यक्त की गई है. इन क्षेत्रों में अधिकतम तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक रह सकता है. प्रयागराज शुक्रवार को राज्य का सबसे गर्म जिला रहा, जहां अधिकतम तापमान 45 डिग्री सेल्सियस दर्ज किया गया.
बांदा के 48 डिग्री तापमान ने बढ़ाई चिंता
बुंदेलखंड क्षेत्र के बांदा जिले में 48 डिग्री सेल्सियस से अधिक तापमान दर्ज होने के बाद प्रशासन और वैज्ञानिक समुदाय की चिंता बढ़ गई है. असामान्य रूप से बढ़ते तापमान के कारणों की जांच के लिए शासन स्तर पर वैज्ञानिक अध्ययन शुरू किया गया है. जिलाधिकारी अमित आसेरी के अनुरोध पर छह वैज्ञानिकों की एक विशेष टीम बांदा पहुंच चुकी है. यह टीम आधुनिक रिमोट सेंसिंग तकनीक, उपग्रह चित्रों और विभिन्न वैज्ञानिक आंकड़ों की मदद से जिले में तापमान वृद्धि के वास्तविक कारणों का अध्ययन करेगी.
जिला आपदा प्रबंधन प्राधिकरण के अनुसार वैज्ञानिक सबसे पहले भूमि सतह तापमान यानी लैंड सरफेस टेम्परेचर का विश्लेषण करेंगे. इसके जरिए उन क्षेत्रों की पहचान की जाएगी जहां तापमान सबसे अधिक दर्ज हो रहा है. साथ ही जिले के हॉटस्पॉट क्षेत्रों का मानचित्रण भी किया जाएगा. अध्ययन के दौरान हरित क्षेत्र, वन क्षेत्र और वृक्षों की संख्या में आई कमी का भी आकलन किया जाएगा. विशेषज्ञों का मानना है कि इस अध्ययन से न केवल बांदा में बढ़ती गर्मी के कारणों का पता चलेगा, बल्कि भविष्य में तापमान नियंत्रण और पर्यावरण संरक्षण के लिए प्रभावी रणनीति बनाने में भी मदद मिलेगी.