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Pooja Pal Letter Dispute: 'अगर मेरी हत्या हुई तो जिम्मेदार...', सपा से निष्कासित पूजा पाल ने अखिलेश यादव को पत्र लिख दी ये चेतावनी

सपा से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाते हुए कहा है कि यदि उनकी हत्या होती है तो इसके लिए सपा और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे. पूजा पाल ने यह भी आरोप लगाया कि भाजपा प्रत्याशी को वोट देने पर उन्हें निकाला गया, जबकि खुद अखिलेश और उनकी पत्नी ने भाजपा को वोट दिया था.

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Pooja Pal Letter Dispute: समाजवादी पार्टी से निष्कासित विधायक पूजा पाल ने पार्टी प्रमुख अखिलेश यादव पर गंभीर आरोप लगाए हैं. उन्होंने सपा पर पिछड़े और दलितों को दूसरे दर्जे का नागरिक मानने और मुस्लिमों को प्राथमिकता देने का आरोप लगाया है. पूजा पाल ने यहां तक कहा कि अगर उनकी हत्या होती है तो इसके लिए सपा और अखिलेश यादव जिम्मेदार होंगे.

हाल ही में संपन्न हुए विधानमंडल सत्र में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की प्रशंसा करने के बाद पूजा पाल को पार्टी से निष्कासित कर दिया गया था. इसके बाद शुक्रवार को उन्होंने एक्स पर अखिलेश यादव के नाम एक पत्र पोस्ट कर सीधे हमला बोला. पत्र में लिखा गया है कि सपा में मुस्लिम चाहे कितने ही बड़े अपराधी क्यों न हों, उन्हें ताकत और सम्मान दिया जाता है, जबकि पिछड़े और दलितों को नजरअंदाज किया जाता है.

पूजा पाल का पत्र

पूजा पाल ने पत्र में लिखा

पूजा पाल ने अपने पत्र में लिखा, 'यदि मुझे भाजपा के राज्यसभा प्रत्याशी को वोट देने के कारण पार्टी से निकाला गया है तो यह भी सच है कि आपने खुद दिल्ली के कांस्टीट्यूशनल क्लब के चुनाव में भाजपा प्रत्याशी को वोट दिया. यह आपका अहंकार है कि जब एक पिछड़ी जाति की बेटी भाजपा को वोट देती है तो गुनाह लगता है, लेकिन जब आपकी पत्नी भाजपा को वोट देती है तो सही माना जाता है.'

दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप 

उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर दोहरे मापदंड अपनाने का आरोप लगाया. साथ ही यह भी कहा कि उन्हें इंटरनेट मीडिया पर लगातार धमकियां मिल रही हैं. उन्होंने आशंका जताई कि उनके पति की तरह उनकी भी हत्या करवाई जा सकती है. "यदि मेरी हत्या होती है तो इसके लिए अखिलेश यादव और समाजवादी पार्टी जिम्मेदार होंगे," पूजा पाल ने पत्र में लिखा.

राजनीति में मची हलचल 

पूजा पाल के इन आरोपों से उत्तर प्रदेश की राजनीति में हलचल मच गई है. एक ओर सपा नेतृत्व ने उनके बयान पर चुप्पी साध रखी है, वहीं भाजपा इसे सपा की अंदरूनी कलह करार दे रही है. राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह विवाद आने वाले समय में सपा के लिए बड़ी चुनौती साबित हो सकता है.