कानपुर: उत्तर प्रदेश के कानपुर में हुए लैंबॉर्गिनी हादसे ने नया मोड़ ले लिया है. आरोपी शिवम मिश्रा के पिता ने दावा किया है कि हादसे के वक्त उनका बेटा कार नहीं चला रहा था, बल्कि अचानक बेहोश हो गया था.
उनका कहना है कि ड्राइवर का ध्यान शिवम की हालत की ओर गया और उसी दौरान दुर्घटना हुई. वहीं, पुलिस सीसीटीवी फुटेज के आधार पर शिवम को ही चालक मान रही है. इस विरोधाभास ने मामले को और जटिल बना दिया है.
शिवम मिश्रा के पिता ने मीडिया से बातचीत में कहा कि उनका बेटा बेहद सुस्त लग रहा था. कुछ ही पलों में वह बेहोश हो गया. उन्होंने बताया कि ड्राइवर ने शिवम की हालत देखने के लिए ध्यान हटाया और तभी सामने से एक टेंपो आ गया. उनके मुताबिक, कार की रफ्तार बहुत कम थी और तकनीकी जांच एक दिन पहले ही हो चुकी थी.
पिता ने यह भी दावा किया कि हादसे के बाद लैंबॉर्गिनी के दरवाजे अपने आप लॉक हो गए थे. शिवम को बाहर निकालने के लिए कार का शीशा तोड़ना पड़ा. उन्होंने कहा कि ड्राइवर और अन्य लोगों की मदद से शिवम को बाहर निकाला गया और तुरंत डॉक्टर के पास भेजा गया, जहां उसका इलाज किया गया.
शिवम के वकील मृत्तुंजय कुमार ने भी यही दोहराया कि उनका मुवक्किल ड्राइविंग सीट पर नहीं था. उनके अनुसार, शिवम पैसेंजर सीट पर बैठा था और बेहोशी की हालत में था. वकील ने कहा कि मोहन नाम के व्यक्ति ने खुद को ड्राइवर बताया है. बुधवार को कोर्ट में जमानत याचिका और जब्त कार की रिहाई पर सुनवाई होगी.
कानपुर पुलिस कमिश्नर ने साफ कहा कि जांच में मिले साक्ष्यों से शिवम ही ड्राइवर साबित हुआ है. उन्होंने बताया कि सीसीटीवी फुटेज समेत अन्य सबूतों के आधार पर शिवम का नाम एफआईआर में जोड़ा गया है. पुलिस का कहना है कि जांच अभी जारी है और हर पहलू पर ध्यान दिया जा रहा है.
पुलिस ने लैंबॉर्गिनी कार को जब्त कर लिया है. शिवम के पिता को नोटिस जारी किया गया है और उन्हें ग्वालटोली कोतवाली पहुंचकर बयान दर्ज कराने को कहा गया है. अधिकारियों का कहना है कि सभी दावों की जांच की जा रही है और सच्चाई तथ्यों के आधार पर सामने लाई जाएगी.