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राहुल बनकर जुबैर अली ने युवती को प्रेमजाल में फंसाया, नौकरी का झांसा देकर किया रेप और ब्लैकमेल, जानें पूरा मामला

गाजियाबाद के मुरादनगर इलाके में युवती से झूठी पहचान बताकर रेप और ब्लैकमेल का सनसनीखेज मामला सामने आया है. जानकारी के अनुसार आरोपी जुबैर अली ने खुद को राहुल नाम से पेश किया, नौकरी का झांसा देकर युवती को अपने जाल में फंसाया और होटल में ले जाकर दुष्कर्म किया.

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Kuldeep Sharma

गाजियाबाद जिले के मुरादनगर थाना क्षेत्र में एक युवती ने गंभीर आरोप लगाते हुए कहा कि एक युवक ने फर्जी नाम और नौकरी का झांसा देकर उसके साथ रेप किया. युवती का कहना है कि आरोपी जुबैर अली ने खुद को राहुल बताकर पहले विश्वास जीता, फिर होटल में बुलाकर दुष्कर्म किया और उसकी निजी जिंदगी को वीडियो बनाकर ब्लैकमेलिंग का शिकार बनाया.

पीड़िता के अनुसार आरोपी ने सोशल मीडिया के जरिए उससे संपर्क साधा और खुद का नाम राहुल बताया. नौकरी दिलाने का झांसा देकर उसने विश्वास हासिल किया. इसके बाद होटल में बुलाकर शारीरिक संबंध बनाए और वारदात का वीडियो रिकॉर्ड कर लिया. इस वीडियो को आधार बनाकर आरोपी लगातार उसे दबाव में रखता रहा और बार-बार होटल बुलाकर संबंध बनाने पर मजबूर करता रहा.

ब्लैकमेलिंग और संपत्ति पर हाथ साफ

युवती ने अपनी शिकायत में बताया कि आरोपी ने न केवल उसका शारीरिक शोषण किया बल्कि उसके घर से सोने की अंगूठी, कुंडल, चांदी के सामान और दो मोबाइल फोन भी हड़प लिए. जब पीड़िता ने विरोध किया तो आरोपी ने धमकी दी कि अगर उसने पुलिस में शिकायत की तो जेल से जल्दी बाहर आकर वह उसे और उसके परिवार को नुकसान पहुंचाएगा. यह धमकी युवती और उसके परिजनों के लिए मानसिक यातना का कारण बनी.

पुलिस कार्रवाई और BNS की धाराएं

गंभीरता को देखते हुए पुलिस ने त्वरित कार्रवाई की और आरोपी जुबैर अली को गिरफ्तार कर लिया. उसके खिलाफ नई भारतीय न्याय संहिता (BNS) 2023 की धारा 64 (दुष्कर्म), 308(2) (जान से मारने की धमकी) और 351 (संपत्ति हड़पना) में मामला दर्ज किया गया है. एडिशनल सीपी आलोक प्रियदर्शी ने पुष्टि की कि आरोपी को पुलिस हिरासत में लेकर पूछताछ जारी है.

संगठनों ने जताया आक्रोश

यह मामला सामने आते ही हिंदू संगठनों में आक्रोश फैल गया. कार्यकर्ता थाने पहुंचे और आरोपी पर कड़ी कार्रवाई की मांग की. उनका कहना है कि यह 'लव जिहाद' का साफ उदाहरण है और इस तरह की घटनाएं समाज में असुरक्षा की भावना पैदा करती हैं. सवाल यह है कि झूठी पहचान और छल से महिलाओं की जिंदगी कब तक खतरे में डाली जाती रहेगी.