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पालतू गाय की बैंड-बाजों संग निकली शव यात्रा, किसान ने किया अंतिम संस्कार

शाहजहांपुर के जैतीपुर क्षेत्र में एक किसान ने अपनी पालतू गाय के निधन पर पूरे सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया. ढोल-बाजों के साथ निकली अंतिम यात्रा ने इंसान और पशु के गहरे रिश्ते को उजागर किया.

Gemini AI
Kanhaiya Kumar Jha

शाहजहांपुर: उत्तर प्रदेश के शाहजहांपुर जिले से इंसानियत और संवेदनशीलता से भरी एक अनोखी कहानी सामने आई है. जैतीपुर क्षेत्र के करकौर गांव में एक किसान ने अपनी पालतू गाय को परिवार के सदस्य की तरह विदाई दी. गाय के निधन के बाद जिस तरह से पूरे धार्मिक विधि-विधान और सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया, उसने पूरे गांव ही नहीं बल्कि आसपास के इलाकों के लोगों को भी भावुक कर दिया.

किसान सर्वेश शर्मा ने लगभग 20 साल पहले इस गाय को पाला था. उस समय उनकी आर्थिक स्थिति बेहद कमजोर थी. परिवार की जरूरतें पूरी करना मुश्किल था. ऐसे दौर में यही गाय उनके लिए संबल बनी. गाय के दूध से होने वाली आमदनी ने उनके बच्चों की परवरिश में अहम भूमिका निभाई. सर्वेश बताते हैं कि यह गाय उनके परिवार के लिए सिर्फ पशु नहीं, बल्कि भाग्य बदलने वाली साथी थी.

बीमारी के बाद हुई मौत

बीते कुछ समय से गाय की तबीयत खराब चल रही थी. इलाज भी कराया गया, लेकिन उम्र और बीमारी ने आखिरकार उसे कमजोर कर दिया. शनिवार रात गाय की मौत हो गई. जैसे ही यह खबर गांव में फैली, लोग सर्वेश शर्मा के घर पहुंचने लगे. परिवार पर दुखों का पहाड़ टूट पड़ा. गाय के जाने से मानो घर का एक सदस्य बिछड़ गया हो.

ढोल-बाजों के साथ निकली अंतिम यात्रा

रविवार दोपहर को गाय की अंतिम यात्रा निकाली गई. बैलगाड़ी पर गाय के शव को सजाकर रखा गया. आगे-आगे ढोल-बाजे बजते रहे. गांव के पुरुष, महिलाएं और बुजुर्ग इस यात्रा में शामिल हुए. यह दृश्य किसी इंसान की शव यात्रा जैसा ही था. हर कोई किसान की भावना को समझ रहा था और इस अनोखे सम्मान को देखकर भावुक हो रहा था.

खेत में विधि-विधान से हुआ अंतिम संस्कार

सर्वेश शर्मा ने अपने खेत में जेसीबी से गड्ढा खुदवाया. धर्म-कर्म के अनुसार गाय का अंतिम संस्कार किया गया. इस दौरान गांव के महावीर सिंह, पूर्व प्रधान राजेंद्र पाल गुर्जर, अनूप मिश्रा, नेत्रपाल कश्यप, पप्पू मिश्रा, रामलखन गुप्ता, पेशकर गुर्जर, मैकू कश्यप और रामगोपाल कश्यप सहित कई ग्रामीण मौजूद रहे. सभी ने किसान के इस फैसले की सराहना की.

गांव में बनी मिसाल

ग्रामीणों का कहना है कि सर्वेश शर्मा ने यह साबित कर दिया कि गाय सिर्फ पशु नहीं होती. वह परिवार का हिस्सा बन जाती है. लोगों ने कहा कि जिस तरह से किसान ने गाय को जीते जी सम्मान दिया और मरने के बाद भी पूरे सम्मान से विदा किया, वह समाज के लिए एक मिसाल है. यह घटना ग्रामीण भारत में इंसान और पशु के गहरे रिश्ते को साफ तौर पर दिखाती है.