बरेली DM ने तोड़ी जागेश्वर धाम की पवित्रता, पुजारियों में आक्रोश; हो रही जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के बरेली जिला मजिस्ट्रेट को जागेश्वर धाम में सुरक्षा बलों के साथ गर्भग्रह में प्रवेश करने के बाद कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. पुजारी इसे नियमों के विरुध बता रहे हैं.

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Meenu Singh

लखनऊ: उत्तर प्रदेश के एक जिला मजिस्ट्रेट को एक घटना के बाद कड़ी आलोचनाओं का सामना करना पड़ा. उत्तराखंड के एक प्राचीन मंदिर में हुई एक घटना ने धार्मिक मर्यादाओं और प्रशासनिक प्रोटोकॉल के बीच बहस छेड़ दी है. उत्तर प्रदेश के एक जिला मजिस्ट्रेट के गर्भगृह में प्रवेश के दौरान सशस्त्र सुरक्षा कर्मियों ने भी उनके साथ प्रवेश किया.

इस घटना के बाद केवल स्थानीय लोगों में ही बल्कि पुजारियों में भी आक्रोश देखने को मिला. व्यापक विरोध के बाद मामला अब जांच के दायरे में आ गया है. यह घटना जागेश्वर धाम में सामने आई, जहां बरेली के जिला मजिस्ट्रेट अविनाश सिंह ने नवग्रह पूजा के लिए गर्भगृह में प्रवेश किया. 

गर्भगृह की पवित्रता पर उठे सवाल

मंदिर के पुजारियों का कहना है कि गर्भगृह किसी भी मंदिर का सबसे पवित्र स्थान होता है, जहां प्रवेश के सख्त नियम होते हैं. खासतौर पर हथियार जैसी चीजें गर्भग्रह में लेकर जाना पूरी तरह वर्जित माना जाता है. पुजारियों ने यह भी बताया कि उच्च पदस्थ नेताओं के दौरे के समय भी ऐसे नियमों का पालन किया जाता रहा है.

पुजारियों ने किया विरोध 

इस घटना के विरोध में कई पुजारी एकजुट हो गए और उन्होंने इसे धार्मिक मर्यादाओं का उल्लंघन बताया. पंडित नवीन चंद्र भट्ट सहित अन्य पुजारियों ने साफ कहा कि परंपराओं की अनदेखी किसी भी हालत में स्वीकार नहीं की जा सकती और गर्भगृह की पवित्रता बनाए रखना किसी भी कीमत पर अनिवार्य है. किसी भी नेता के लिए ये नियम नहीं बदले जाएंगे. 

सुरक्षा पक्ष का तर्क

वहीं, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि किसी वरिष्ठ अधिकारी के दौरे के दौरान सशस्त्र सुरक्षा देना सामान्य प्रोटोकॉल का हिस्सा होता है. हालांकि, यह दलील पुजारियों और स्थानीय लोगों को संतुष्ट नहीं कर पाई है. उन्होंने इस तर्क के बाद भी इस पर सख्त कार्यवाही की मांग की है.

घटना के बाद मंदिर परिसर में तनाव का माहौल बन गया. प्रशासन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए जांच के आदेश दे दिए हैं, ताकि यह स्पष्ट हो सके कि नियमों का उल्लंघन कैसे हुआ.

 

लगाया चेतावनी बोर्ड

इस घटना के बाद अब पुजारियों ने मंदिर परिसर के अंदर हथियार ले जाने पर रोक लगाने वाले कोई स्पष्ट चेतावनी चिन्ह नहीं लगे थे. उन्होंने स्थल की देखरेख करने वाले भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से स्पष्ट सूचनाएं लगाने का आग्रह किया है. इसके बाद, मंदिर परिसर के भीतर हथियार ले जाने पर प्रतिबंध लगाने वाला एक चेतावनी नोटिस लगा दिया गया है