अक्षय तृतीया पर राधा दामोदर मंदिर में निभेगी 500 वर्ष पुरानी चंदन श्रृंगार परंपरा, भक्तों को होंगे दुर्लभ सर्वांग दर्शन

ब्रजभूमि में अक्षय तृतीया पर्व को लेकर तैयारियां पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ चल रही हैं. भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन के प्रमुख सप्त देवालयों में शामिल श्री राधा दामोदर मंदिर में इस पावन अवसर पर सदियों पुरानी चंदन श्रृंगार की परंपरा निभाई जाएगी.

India Daily
Shilpa Srivastava

वृंदावन: ब्रजभूमि में अक्षय तृतीया पर्व को लेकर तैयारियां पूरे उत्साह और श्रद्धा के साथ चल रही हैं. भगवान श्रीकृष्ण की नगरी वृंदावन के प्रमुख सप्त देवालयों में शामिल श्री राधा दामोदर मंदिर में इस पावन अवसर पर सदियों पुरानी चंदन श्रृंगार की परंपरा निभाई जाएगी. लगभग 500 वर्षों से चली आ रही इस परंपरा के तहत अक्षय तृतीया के दिन ठाकुरजी का विशेष चंदन लेप से श्रृंगार किया जाता है, जो भक्तों के लिए अत्यंत दुर्लभ और पुण्यदायक माना जाता है.

मंदिर के सेवायत आचार्य कृष्ण बलराम गोस्वामी महाराज के अनुसार, यह परंपरा गौड़ीय संप्रदाय के महान संत माधवेंद्र पुरी से जुड़ी हुई है. उन्होंने बताया कि लगभग 500 वर्ष पूर्व माधवेंद्र पुरी पाद महाराज गोवर्धन के जतीपुरा में रहकर श्रीनाथजी की सेवा-पूजा करते थे. एक दिन श्रीनाथजी ने उन्हें स्वप्न में दर्शन देकर शरीर की गर्मी को शांत करने के लिए मलयागिरि से चंदन लाने का निर्देश दिया.

चंदन से होगा ठाकुरजी का श्रृंगार:

आचार्य के अनुसार, जब माधवेंद्र पुरी चंदन लेकर लौट रहे थे, तब खीरचौरा गोपीनाथ मंदिर में उन्हें पुनः आदेश मिला कि वे वहीं चंदन से ठाकुरजी का श्रृंगार करें. इस सेवा से श्रीनाथजी स्वयं प्रसन्न हो जाएंगे. तभी से यह परंपरा प्रारंभ हुई, जो आज भी जीवंत है. इसी परंपरा के चलते ओडिशा में चंदन यात्रा 21 दिनों तक मनाई जाती है, जबकि ब्रज में अक्षय तृतीया के दिन ही भगवान का सर्वांग चंदन श्रृंगार किया जाता है.

चंदन घिसने की प्रक्रिया जारी:

वृंदावन के अन्य प्रमुख मंदिरों, जैसे श्री बांके बिहारी मंदिर में भी होली के बाद से ही चंदन घिसने की प्रक्रिया शुरू हो जाती है. श्री राधा दामोदर मंदिर में दक्षिण भारत से मंगाए गए उच्च गुणवत्ता वाले चंदन को प्रतिदिन घिसकर विशेष लेप तैयार किया जा रहा है. इस लेप में कई प्रकार की जड़ी-बूटियां मिलाई जाती हैं, जिससे यह अत्यंत शीतल और सुगंधित बनता है.

आचार्य पूर्ण चंद्र गोस्वामी महाराज ने बताया कि अक्षय तृतीया के दिन ठाकुरजी को वस्त्र धारण नहीं कराए जाते, बल्कि केवल चंदन लेप से ही उनका श्रृंगार किया जाता है. इस दिन ठाकुर राधा दामोदर लाल के सर्वांग दर्शन होते हैं, जो साल में केवल एक बार ही संभव होते हैं. मान्यता है कि इन दुर्लभ दर्शनों से भक्तों के सभी कष्ट और ताप दूर हो जाते हैं.

भगवान के चरणों में चंदन का लड्डू अर्पित करने की परंपरा:

इस अवसर पर भगवान को शीतलता प्रदान करने के लिए सतुआ, शरबत और अन्य प्रसाद अर्पित किए जाते हैं. साथ ही भगवान के चरणों में चंदन का लड्डू भी अर्पित करने की परंपरा है. मंदिर गोस्वामीयों के अनुसार, इस विशेष पर्व पर देशभर से हजारों श्रद्धालु वृंदावन पहुंचते हैं और भगवान के चंदन श्रृंगार के दर्शन कर आध्यात्मिक शांति प्राप्त करते हैं.

अक्षय तृतीया के इस पावन अवसर पर वृंदावन की धार्मिक आस्था और परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिलता है, जो ब्रज की सांस्कृतिक विरासत को जीवंत बनाए हुए है.