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स्मृति मंधाना शादी का पहला कार्ड लेकर क्यों पहुंची राजस्थान, जानें क्या है 200 साल पुराना रिश्ता

भारती महिला क्रिकेट टीम की उपकप्तान स्मृति मंधाना रविवार को शादी के बंधन में बंधने वाली हैं. इससे पहले वो अपनी शादी का कार्ड लेकर राजस्थान पहुंची.

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Praveen Kumar Mishra

जयपुर: भारतीय महिला क्रिकेट टीम की उप-कप्तान स्मृति मंधाना इन दिनों सुर्खियों में हैं. वजह है उनकी आने वाली शादी. संगीतकार पलाश मुछाल के साथ स्मृति जल्द ही सात फेरे लेने वाली हैं. 

हालांकि, शादी की तैयारियों में सबसे खास बात यह रही कि स्मृति ने अपना पहला विवाह निमंत्रण कार्ड राजस्थान के डीडवाना स्थित सुरल्या माता मंदिर को भेजा. आखिर ऐसा क्यों किया गया? इसके पीछे एक 200 साल पुराना पारिवारिक रिश्ता छिपा है.

200 साल पहले डीडवाना से सांगली तक का सफर

स्मृति मंधाना का जन्म भले ही महाराष्ट्र के सांगली में हुआ हो, लेकिन उनके पूर्वज करीब दो सौ साल पहले राजस्थान के डीडवाना शहर से वहाँ बसने गए थे. उस समय उनके परिवार का घर डीडवाना के कोट मोहल्ले में था. 

कुलदेवी सुरल्या माता की पूजा भी यहीं होती थी. बाद में परिवार महाराष्ट्र चला गया लेकिन कुलदेवी के प्रति आस्था आज भी वैसी की वैसी बनी हुई है. आज सुरल्या माता की मूर्ति डीडवाना के सुपका रोड पर बने भव्य मंदिर में विराजमान है. 

पांच साल पहले मां के साथ आए थे दर्शन

मंदिर के पुजारी गोविंद व्यास और अमित व्यास बताते हैं कि करीब पांच साल पहले स्मृति अपनी मां के साथ सुरल्या माता के दर्शन करने आई थीं. उस समय उन्होंने माता से आशीर्वाद लिया था. 

स्मृति की मां का कहना है कि माता की कृपा से बेटी की हर मनोकामना पूरी हुई और आज क्रिकेट में जो मुकाम हासिल किया उसमें कुलदेवी का आशीर्वाद बहुत बड़ा सहारा बना.

दूल्हे का परिवार भी डीडवाना से जुड़ा

दिलचस्प बात यह है कि स्मृति जिस परिवार में ब्याह कर जा रही हैं, उसका भी डीडवाना से गहरा नाता है. पलाश मुच्छल का परिवार अभी इंदौर में रहता है लेकिन उनके पूर्वज भी डीडवाना के ही निवासी थे. 

उनका पैतृक घर सोमानियों की गली में था. मुच्छल परिवार श्याम महाराज मंदिर का बड़ा भक्त है और करीब डेढ़ सौ साल पहले उनके पूर्वजों ने उस मंदिर के निर्माण में अहम योगदान दिया था.

कुलदेवी को पहला निमंत्रण

राजस्थान और मारवाड़ी समाज में यह परंपरा सदियों से चली आ रही है कि कोई शुभ कार्य हो तो सबसे पहले कुलदेवी-कुलदेवता को निमंत्रण दिया जाता है. स्मृति मंधाना ने भी यही किया. शादी का पहला कार्ड मंदिर पहुंचते ही पुजारी ने माता के चरणों में रखा और विशेष पूजा-अर्चना की.