मुख्यमंत्री भगवंत मान की अगुवाई में पंजाब सरकार ने राज्यभर की सड़कों को टिकाऊ और सुरक्षित बनाने के लिए ऐतिहासिक कदम उठाया है. अक्टूबर 2025 में शुरू हुई ‘सीएम फ्लाइंग स्क्वाड’ पहल का मकसद 44,920 किमी सड़क नेटवर्क में पारदर्शिता और गुणवत्ता को मजबूत करना है. लॉकिंग सिस्टम ऐसा बनाया गया है कि ठेकेदार न केवल सड़क बनाएंगे, बल्कि पांच साल तक उसके रखरखाव के लिए भी जवाबदेह होंगे. पंचायत की संतुष्टि के बाद ही भुगतान की शर्त इसे और कड़ा बनाती है.
फ्लाइंग स्क्वाड का उद्देश्य और कार्रवाई
सरकार की इस विशेष टीम में मंडी बोर्ड और लोक निर्माण विभाग के अधिकारी शामिल हैं, जो अचानक निरीक्षण कर निर्माण की गुणवत्ता की जांच करते हैं. खराब काम मिलने पर कई ठेकेदारों के अनुबंध तुरंत रद्द किए गए हैं. इससे सड़कों पर अनियमितताओं पर अंकुश लगा है.
पांच साल रखरखाव की सख्त शर्त
हर ठेकेदार को सड़क निर्माण के बाद पांच वर्ष तक मरम्मत और देखभाल की जिम्मेदारी निभानी होगी. लापरवाही की स्थिति में ब्लैकलिस्टिंग तय है. इस व्यवस्था ने ठेकेदारों को अधिक जिम्मेदारी से काम करने के लिए प्रेरित किया है, जिससे सड़कों की उम्र और मजबूती दोनों बढ़ी हैं.
ग्रामीण लिंक रोड परियोजनाओं पर खास निगरानी
3,425 करोड़ रुपये की ग्रामीण लिंक रोड परियोजना पर फ्लाइंग स्क्वाड की कड़ी नजर है. जिन जिलों में निरीक्षण हुए, वहां गुणवत्ता में स्पष्ट सुधार दर्ज किया गया. ग्रामीण सड़कों के बेहतर होने से किसानों, व्यापारियों और आम लोगों की आवाजाही सरल हुई है.
पंचायत की संतुष्टि से तय होगा भुगतान
नई नीति के तहत ठेकेदारों को पैसा तभी मिलेगा जब पंचायत कार्य से संतुष्ट होगी. यह व्यवस्था स्थानीय लोकतंत्र को मजबूत करती है और विकास में लोगों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित करती है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा, स्वास्थ्य और व्यापार तक पहुंच भी बेहतर हुई है.
अन्य राज्यों के लिए प्रेरक मॉडल
सड़क निर्माण में पारदर्शिता की यह नीति उन राज्यों के लिए मिसाल बनी है, जहां निर्माण कार्य अक्सर देरी और भ्रष्टाचार से प्रभावित रहते हैं. पंजाब का सख्त मॉडल दिखाता है कि रखरखाव को अनुबंध का अनिवार्य हिस्सा बनाने से सड़कें टिकाऊ बन सकती हैं और विकास में गति लाई जा सकती है.