पंजाब की सड़कों पर पहले बच्चे भीख मांगते दिखते थे, लेकिन अब मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान की ‘प्रोजेक्ट जीवनज्योत’ ने उनके हाथों में किताबें और सपने थमाए हैं. यह परियोजना बच्चों को भीख मांगने की मजबूरी से निकालकर शिक्षा और सम्मानजनक जीवन की ओर ले जा रही है. पंजाब अब देश के लिए एक अनोखा ‘एंटी-बेगिंग’ मॉडल बन रहा है, जो बच्चों के भविष्य को रोशन कर रहा है.
पहले चरण की उपलब्धियां
जुलाई 2024 में शुरू हुए प्रोजेक्ट जीवनज्योत के पहले चरण में 753 छापेमारी अभियानों के जरिए 367 बच्चों को बचाया गया. इनमें से 350 बच्चे अपने परिवारों के पास लौटाए गए, 17 को बाल देखभाल संस्थानों में भेजा गया, और 183 बच्चों को स्कूलों में दाखिल किया गया. 30 बच्चों को प्रायोजन योजना से जोड़ा गया, जबकि 8 छोटे बच्चों को आंगनवाड़ी में भेजा गया.
जीवनज्योत 2.0 की शुरुआत
जुलाई 2025 में शुरू हुए जीवनज्योत 2.0 ने एक महीने में 523 छापों में 279 बच्चों को बचाया. इनमें से 137 बच्चों को तुरंत उनके परिवारों के पास भेजा गया, और 142 को बाल देखभाल केंद्रों में रखा गया. डीएनए सैंपलिंग जैसे आधुनिक तरीकों से बच्चों की पहचान सुनिश्चित की जा रही है.
समग्र दृष्टिकोण
यह परियोजना सिर्फ बच्चों को बचाने तक सीमित नहीं है. गरीबी और नशे जैसी समस्याओं को जड़ से खत्म करने के लिए परिवारों को रोजगार, पोषण और शिक्षा से जोड़ा जा रहा है. यह एक समग्र मॉडल है, जो बच्चों और उनके परिवारों को आत्मनिर्भर बनाने पर केंद्रित है.
देश के लिए मॉडल
पंजाब सरकार अब सख्त कानून लाने की तैयारी में है, जो बच्चों का शोषण रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई करेगा. त्योहारों और मेलों में विशेष बचाव दलों की तैनाती से यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि कोई बच्चा भीख मांगने को मजबूर न हो. यह पहल देश के लिए एक आदर्श बन रही है.