अस्पताल के बाहर पंचर पड़ी रही एम्बुलेंस, 5 घंटे तक इंतजार करने के बाद प्रसव पीड़ा से जूझते हुए गर्भवती ने तोड़ा दम
स्वास्थ्य व्यवस्था की लापरवाही के कारण गर्भवती महिला शारदा उइके की मौत हो गई. अस्पताल के बाहर पंचर एम्बुलेंस खड़ी थी, जबकि दूसरी एम्बुलेंस 100 किमी दूर से 5 घंटे बाद पहुंची.
छिंदवाड़ा: मध्य प्रदेश के छिंदवाड़ा जिले के तामिया ब्लॉक से स्वास्थ्य व्यवस्था की गंभीर लापरवाही का दर्दनाक मामला सामने आया है. यहां समय पर एम्बुलेंस नहीं मिलने और जरूरी चिकित्सा सुविधाओं की कमी के कारण एक गर्भवती महिला की मौत हो गई. टॉपरवानी गांव की रहने वाली शारदा उइके ने करीब 5 घंटे तक मदद का इंतजार किया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही रास्ते में उनकी जान चली गई.
जानकारी के अनुसार गुरुवार को शारदा उइके को अचानक प्रसव पीड़ा शुरू हुई. परिवार ने तुरंत जननी 108 एम्बुलेंस को फोन किया लेकिन जवाब मिला कि चावलपानी क्षेत्र में एम्बुलेंस उपलब्ध नहीं है. यह सुनकर परिजन परेशान हो गए और मदद के लिए इधर-उधर संपर्क करने लगे.
क्या लापरवाही आई सामने?
सबसे चौंकाने वाली बात यह रही कि चावलपानी प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र के सामने ही जननी एक्सप्रेस एम्बुलेंस पंचर हालत में खड़ी थी. समय रहते उसे ठीक नहीं कराया गया था, जिसके कारण आपातकालीन स्थिति में उसका उपयोग नहीं हो सका. इस लापरवाही ने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया.
महिला के पति ने क्या लगाया आरोप?
इसके बाद पगारा से एम्बुलेंस भेजी गई, जो करीब 100 किलोमीटर दूर से आई. गांव तक पहुंचने में उसे 4 से 5 घंटे लग गए. तब तक शारदा की घर पर ही डिलीवरी हो चुकी थी. महिला के पति ने आरोप लगाया कि पगारा से आई एम्बुलेंस में ऑक्सीजन की सुविधा भी नहीं थी, जिससे स्थिति और खराब हो गई.
बाद में चावलपानी स्वास्थ्य केंद्र से ऑक्सीजन सिलेंडर की व्यवस्था की गई और महिला को तामिया रेफर किया गया. जब उन्हें चावलपानी स्वास्थ्य केंद्र लाया गया, तब भी उन्हें एम्बुलेंस से नीचे नहीं उतारा गया. जननी एक्सप्रेस में मौजूद नर्स ने करीब 2 घंटे तक 108 एम्बुलेंस में ही प्राथमिक उपचार दिया और डॉक्टर से फोन पर सलाह लेकर इलाज करती रहीं.
कैसे हुई महिला की मौत?
महिला की हालत लगातार बिगड़ती रही. जब उन्हें तामिया रेफर किया गया, तब तक बहुत देर हो चुकी थी. रास्ते में ही शारदा उइके ने दम तोड़ दिया. इस घटना के बाद परिवार और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है. लोगों का कहना है कि अगर समय पर एम्बुलेंस और सही इलाज मिल जाता, तो महिला की जान बच सकती थी.
जिला मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी नरेश गुन्नाड़े ने कहा कि मामला बेहद गंभीर है. एम्बुलेंस का पंचर होना और ऑक्सीजन की कमी जैसे बिंदुओं पर जांच की जा रही है. यदि लापरवाही साबित होती है, तो दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी.