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एम्बुलेंस पर लगे मरीज के खून के धब्बे को उसकी पत्नी से करवाया साफ, अस्पताल में धुलवाई गाड़ी; वीडियो वायरल होने पर लिया गया एक्शन

कटनी जिला अस्पताल में एक घायल मरीज की पत्नी से 108 एंबुलेंस साफ करवाने का मामला सामने आया. घटना का वीडियो वायरल होने के बाद प्रशासन ने जांच कराई. चलिए जानते हैं इस मामले में क्या एक्शन लिया गया.

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Km Jaya

कटनी: मध्य प्रदेश के कटनी जिले से एक हैरान करने वाला मामला सामने आया है, जहां एक घायल मरीज की पत्नी से 108 एंबुलेंस साफ करवाई गई. इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिसके बाद प्रशासन ने तुरंत कार्रवाई की. जांच के बाद एंबुलेंस चालक और इमरजेंसी मेडिकल टेक्नीशियन यानी EMT को नौकरी से हटा दिया गया.

यह घटना कटनी जिला अस्पताल की बताई जा रही है. जानकारी के अनुसार, करेला गांव में हुए एक सड़क हादसे में राहुल बर्मन नाम का युवक घायल हो गया था. उसे इलाज के लिए 108 एंबुलेंस से जिला अस्पताल लाया गया. हादसे में घायल होने के कारण एंबुलेंस के अंदर खून के धब्बे लग गए थे.

ड्यूटी पर मौजूद EMT पर क्या लगे आरोप?

आरोप है कि ड्यूटी पर मौजूद EMT मोहित खटीक ने घायल राहुल बर्मन की पत्नी प्रमिला बर्मन से कहा कि वह एंबुलेंस को साफ करे. इसके बाद महिला को खुद एंबुलेंस धोने के लिए मजबूर किया गया. इस दौरान वहां मौजूद किसी व्यक्ति ने इसका वीडियो बना लिया, जो बाद में सोशल मीडिया पर वायरल हो गया.

वीडियो सामने आने के बाद लोगों ने इस घटना पर नाराजगी जताई. लोगों का कहना था कि एक परेशान और दुखी महिला से इस तरह का काम करवाना अमानवीय है. मामला बढ़ने पर जिला कलेक्टर आशीष तिवारी ने तुरंत जांच के आदेश दिए.

मुख्य चिकित्सा अधिकारी ने क्या बताया?

कटनी के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी राज सिंह ठाकुर ने मामले की जांच की. जांच में सामने आया कि EMT द्वारा महिला से एंबुलेंस साफ करवाना तय नियमों के खिलाफ था. उन्होंने कहा कि यह व्यवहार पूरी तरह अस्वीकार्य है और स्वास्थ्य सेवाओं की गरिमा के खिलाफ है.

जांच रिपोर्ट के आधार पर क्या लिया गया एक्शन?

जांच रिपोर्ट के आधार पर एंबुलेंस सेवा चला रही कंपनी JAES Projects Pvt Ltd ने सख्त कदम उठाया. कंपनी ने एंबुलेंस पायलट देवा साहू और EMT मोहित खटीक दोनों को सेवा से हटा दिया.

अधिकारियों ने कहा कि इस तरह की घटनाएं दोबारा न हों, इसके लिए जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई जरूरी थी. प्रशासन ने साफ किया कि मरीज और उनके परिवार के साथ सम्मानजनक व्यवहार होना चाहिए. किसी भी परिस्थिति में उनसे ऐसा काम नहीं करवाया जा सकता जो नियमों और इंसानियत दोनों के खिलाफ हो.