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मूसलाधार बारिश में बर्बाद हो गईं मशहूर बुक स्टोर की 5000 किताबें, रीडर्स ने बढ़ाया मदद का हाथ

पिछले कुछ दिनों से बेंगलुरू में लगातार भारी बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने इस हफ्ते ऑरेंज अलर्ट भी जारी कर दिया था. बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया और कई जगहों पर हालात खराब हो गए.

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Sagar Bhardwaj

बेंगलुरू के दिल चर्च स्ट्रीट पर स्थित 'द बुकवॉर्म', यह नाम सुनते ही किताब प्रेमियों के चेहरे पर मुस्कान आ जाती है लेकिन मंगलवार रात को आई मूसलाधार बारिश ने इस मुस्कान को आंसू में बदल दिया. बारिश के कारण दुकान में घुटने-भर पानी भर गया, जिससे लगभग 4,000 से 5,000 किताबें बर्बाद हो गईं. कीचड़ और पानी में डूबी किताबों की तस्वीरें देखकर किसी का भी दिल पसीज जाएगा लेकिन अच्छी खबर यह है कि बुक लवर्स और नेटिजन हरसंभव मदद के लिए आगे आ रहे हैं.  

‘पानी में तैरती रहीं किताबें’ 

द बुकवॉर्म बुक स्टोर के मालिक कृष्णा गौड़ा, जिन्हें प्यार से 'बुकवॉर्म कृष्णा' या 'बेंगलुरू का बुकमैन' कहा जाता है, ने बताया कि बुधवार सुबह जब वह दुकान पर पहुंचे तो नजारा देखकर सन्न रह गए. चारों तरफ कीचड़ और पानी ही पानी था. रात भर हुई तेज बारिश के बाद चर्च स्ट्रीट के निचले इलाकों में पानी भर गया था. कृष्णा के मुताबिक, फर्श से छत तक रखी हजारों किताबें पानी के अंदर समा गईं. उन्होंने इंस्टाग्राम पर तस्वीरें पोस्ट कर बताया, “बेंगलुरू की भारी बारिश के कारण हमने 4,000 से 5,000 किताबें खो दीं.” दो दशक से अधिक पुरानी इस दुकान की पहचान ही नई और पुरानी किताबों का विशाल संग्रह था.  

बुक स्टोर में कैसे भरा पानी

पिछले कुछ दिनों से बेंगलुरू में लगातार भारी बारिश हो रही है. मौसम विभाग ने इस हफ्ते ऑरेंज अलर्ट भी जारी कर दिया था. बारिश के कारण निचले इलाकों में जलभराव हो गया और कई जगहों पर हालात खराब हो गए. इसी बीच चर्च स्ट्रीट पर स्थित द बुकवॉर्म जैसी दुकानें सबसे ज्यादा प्रभावित हुईं, क्योंकि यह इलाका पुरानी नालियों और निचले स्तर पर बसा है. कृष्णा गौड़ा अब  उन किताबों को बचाने की कोशिश कर रहे हैं जो अभी जिंदा बची हैं लेकिन जो चली गईं, उनकी कीमत शायद ही कभी लगाई जा सके.  

पाठकों ने बढ़ाया मदद का हाथ

जैसे ही इस दुखद घटना की खबर फैली, किताब प्रेमियों और नेटिजन्स ने सोशल मीडिया पर समर्थन की बाढ़ ला दी. एक यूजर ने लिखा, “अगर आपको किसी भी तरह की मदद चाहिए तो कृपया बताएं.” दूसरे ने लिखा, “हम आपसे पहले से कहीं ज्यादा किताबें खरीदकर मदद करेंगे.” कई लोग यह पूछ रहे हैं कि इस दुकान को फिर से खड़ा करने में कैसे योगदान दिया जा सकता है.