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7 साल से लापता बच्ची का नहीं मिला कोई सुराग, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार; CBI जांच की दी चेतावनी!

झारखंड हाईकोर्ट ने 2018 से लापता बच्ची के मामले में सख्ती दिखाते हुए सरकार को दो हफ्ते का समय दिया है. प्रगति नहीं होने पर मामला सीबीआई को सौंपने की चेतावनी दी गई है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
7 साल से लापता बच्ची का नहीं मिला कोई सुराग, हाईकोर्ट ने लगाई फटकार; CBI जांच की दी चेतावनी!
Courtesy: social media

रांची: झारखंड में सात साल से लापता एक बच्ची के मामले ने फिर तूल पकड़ लिया है. झारखंड हाई कोर्ट ने इस मामले में जांच की धीमी रफ्तार पर कड़ा रुख अपनाते हुए राज्य सरकार से जवाब मांगा है. अदालत ने स्पष्ट कहा कि यदि दो सप्ताह के भीतर ठोस प्रगति नहीं दिखी, तो केस को सीबीआई को सौंपा जा सकता है. इस टिप्पणी ने पूरे मामले को फिर से चर्चा में ला दिया है.

अदालत की सख्त टिप्पणी

सुनवाई के दौरान अदालत ने जांच एजेंसियों की कार्यशैली पर गंभीर सवाल उठाए. जस्टिस सुजीत नारायण प्रसाद और जस्टिस संजय प्रसाद की पीठ ने पूछा कि आखिर सात साल बीत जाने के बाद भी बच्ची का कोई सुराग क्यों नहीं मिला. अदालत ने इसे बेहद चिंताजनक बताया और कहा कि ऐसी जांच व्यवस्था पर भरोसा करना मुश्किल हो जाता है. कोर्ट ने राज्य सरकार को स्पष्ट निर्देश दिया कि दो हफ्तों के भीतर विस्तृत और संतोषजनक रिपोर्ट पेश की जाए, अन्यथा कड़ी कार्रवाई के लिए तैयार रहना होगा.

जांच एजेंसियों पर सवाल

इस मामले में पुलिस की भूमिका पर भी सवाल उठे हैं. सुनवाई के दौरान राज्य की पुलिस प्रमुख ने वर्चुअल माध्यम से जांच की स्थिति की जानकारी दी, लेकिन अदालत उनके जवाब से संतुष्ट नहीं दिखी. कोर्ट ने गुमला के पुलिस अधीक्षक से भी जवाब मांगा और पाया कि जांच में अपेक्षित तेजी नहीं दिखाई गई. इस पर नाराजगी जताते हुए अदालत ने कहा कि इतने लंबे समय तक किसी मामले का अनसुलझा रहना गंभीर लापरवाही को दर्शाता है.

अन्य मामलों में भी सुनवाई

इसी दौरान अदालत में अन्य मामलों की भी सुनवाई हुई. एक मामले में आतंकी गतिविधियों से जुड़े आरोपी की जमानत याचिका खारिज कर दी गई. जांच एजेंसियों के अनुसार, आरोपी के पास से आपत्तिजनक सामग्री बरामद हुई थी और वह युवाओं को भड़काने की कोशिश कर रहा था. इसके अलावा नकली नोट से जुड़े एक अन्य मामले में साक्ष्य के अभाव में एक आरोपी को जमानत दी गई. इन मामलों ने राज्य में कानून व्यवस्था की स्थिति पर भी सवाल खड़े किए हैं.

आगे की कार्रवाई पर नजर

अब सबकी नजर इस बात पर टिकी है कि राज्य सरकार अदालत के निर्देशों पर कितना प्रभावी कदम उठाती है. यदि तय समय सीमा के भीतर कोई ठोस प्रगति नहीं होती, तो मामला सीबीआई को सौंपा जा सकता है. यह न केवल जांच एजेंसियों के लिए चुनौती है, बल्कि पीड़ित परिवार के लिए न्याय की उम्मीद भी इससे जुड़ी हुई है. आने वाले दिनों में इस मामले की दिशा काफी हद तक तय हो सकती है.