दिल्ली के नॉर्थ-ईस्ट इलाके में स्थित मजनू का टीला, जो अपने सस्ते और स्वादिष्ट तिब्बती व एशियन फूड के लिए जाना जाता है, अब मुश्किल दौर से गुजर रहा है. यहां मौजूद कई लोकप्रिय कैफे, बार और रेस्टोरेंट बंद हो सकते हैं. वजह है दिल्ली हाईकोर्ट की सख्ती, जिसने सेफ्टी नियमों और बिल्डिंग प्लान को लेकर कड़ा रुख अपनाया है.
दिल्ली हाईकोर्ट ने बुधवार को साफ निर्देश दिए कि मजनू का टीला में बिना मंजूर बिल्डिंग प्लान और पर्याप्त फायर सेफ्टी व्यवस्था के चल रहे सभी कैफे और रेस्टोरेंट्स पर कार्रवाई की जाए. कोर्ट का कहना है कि किसी भी व्यावसायिक गतिविधि को नियमों के बिना चलने की इजाजत नहीं दी जा सकती, खासकर जब लोगों की जान से जुड़ा मामला हो.
यह मामला एक याचिका के जरिए सामने आया, जिसमें दावा किया गया कि यमुना नदी के किनारे मजनू का टीला इलाके में कई बहुमंजिला इमारतें बिना कानूनी अनुमति के बनाई गई हैं. इन इमारतों का इस्तेमाल कमर्शियल रूप से किया जा रहा है, जबकि इनके पास न तो सही बिल्डिंग अप्रूवल है और न ही जरूरी सेफ्टी इंतजाम.
मुख्य न्यायाधीश देवेन्द्र कुमार उपाध्याय और जस्टिस तुषार राव गेडेला की बेंच ने याचिका का निपटारा करते हुए संबंधित एजेंसियों को निर्देश दिया कि वे शिकायतों की समीक्षा कर कानून के अनुसार उचित कार्रवाई करें. कोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई जल्द से जल्द की जाए और बेहतर होगा कि तीन महीने के भीतर पूरी कर ली जाए.
याचिका में यह भी मांग की गई थी कि दिल्ली विकास प्राधिकरण (DDA), नगर निगम (MCD) और दिल्ली फायर सर्विस नेशनल बिल्डिंग कोड और फायर सेफ्टी नियमों को सख्ती से लागू करें. बताया गया कि कई इमारतों में तीसरी या चौथी मंजिल के बाद सीढ़ियां तक नहीं हैं और सिर्फ छोटे, कम क्षमता वाले लिफ्ट ही मौजूद हैं, जो आपात स्थिति में खतरनाक साबित हो सकते हैं.
सुनवाई के दौरान जस्टिस गेडेला ने हल्के-फुल्के अंदाज में यह भी कहा कि दिल्ली यूनिवर्सिटी के आधे छात्र मजनू का टीला के कैफे में ही मिल जाते हैं. हालांकि उन्होंने यह भी साफ कर दिया कि नियमों के खिलाफ चल रही दुकानों और रेस्टोरेंट्स को हटाया जाएगा.
अब अगर नियमों का पालन नहीं हुआ, तो मजनू का टीला के कई मशहूर कैफे बंद हो सकते हैं. इससे न सिर्फ कारोबारियों, बल्कि छात्रों और फूड लवर्स पर भी सीधा असर पड़ सकता है.