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स्वाति मालीवाल और 'आप' की तबाही का कनेक्शन, 2 साल पहले ही तैयार हो गई थी पार्टी की बर्बादी की स्क्रिप्ट?

राघव चड्ढा समेत आप के 7 राज्यसभा सांसदों के बीजेपी में शामिल होने के बाद अब चर्चा स्वाति मालीवाल को लेकर हो रही है, जिन्होंने 2 साल पहले पार्टी आलाकमान पर गंभीर आरोप लगाकर हलचल मचा दी थी. माना जा रहा है कि पार्टी में आज जो फूट नजर आ रही है, यह उसी एक्शन का रिएक्शन है.

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Kanhaiya Kumar Jha

नई दिल्ली: आम आदमी पार्टी के चर्चित चेहरों में से एक और वर्तमान में राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा ने आप छोड़ बीजेपी का दामन थाम लिया है. राघव चड्ढा के साथ-साथ आप के 6 और सांसदों ने भी पार्टी का साथ छोड़ दिया है, जिसे पंजाब में होनेवाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी के लिए बड़ा झटका माना जा रहा है. खास बात यह है कि राज्यसभा में आप के कुल 10 ही सांसद हैं, जिनमें से 7 ने बीजेपी ज्वाइन कर ली है. 

राघव चड्ढा समेत 7 आप सांसदों का बीजेपी में शामिल होना पार्टी के अंदर चल रही गुटबाजी को तो सामने लाती ही है, लेकिन इस सबसे अलग इस घटनाक्रम से पार्टी की साख को भी बड़ा झटका लगा है, जिससे पार पाना 'आप' के लिए आसान नहीं होनेवाला है. भले ही आप सांसदों का पार्टी छोड़ने का ऐलान आज सामने आया हो, लेकिन हकीकत यह है कि इस बगावत की आग तभी जल गई थी, जब पार्टी की कद्दावर महिला नेता स्वाति मालीवाल ने आप के सर्वेसर्वा अरविन्द केजरीवाल पर कई गंभीर आरोप लगाए थे. आज जिन 7 सांसदों ने आप में शामिल होने का ऐलान किया है, उसमें स्वाति मालीवाल का नाम भी शामिल है. 

कैसे स्वाति मालीवाल बनी पार्टी में फूट की वजह?

स्वाति मालीवाल को आम आदमी पार्टी ने जनवरी 2024 में राज्यसभा सांसद बनाया. जानकारों के अनुसार, पार्टी में दिख रही फूट की पहली दरार स्वाति मालीवाल ही हैं. मई 2024 से उनकी और पार्टी की दूरियां बढ़ीं, जो भाजपा में शामिल होने के एलान के साथ खत्म हुईं. यह वही वक्त था जब केजरीवाल को जेल जाना पड़ा और राघव चड्ढा व स्वाति मालीवाल ने उनसे दूरी बना ली.

सीएम आवास में मारपीट का लगाया था आरोप

जब अरविंद केजरीवाल 2024 में लोकसभा चुनाव प्रचार के लिए कुछ दिन जेल से बाहर आए तो स्वाति मालीवाल उनसे मिलने गईं. बाद में उन्होंने आरोप लगाया कि सीएम आवास में बिभव कुमार ने उनके साथ हाथापाई की. केजरीवाल घर के अंदर थे, लेकिन उनसे मिलने नहीं दिया गया. इस घटना के चलते बिभव कुमार को जेल जाना पड़ा. यहीं से स्वाति पार्टी से दूर हो गईं और पार्टी के खिलाफ सोशल मीडिया पर पोस्ट करती रहीं, लेकिन पार्टी नहीं छोड़ी. लंबे समय से कयास थे कि वह भाजपा ज्वाइन कर सकती हैं, लेकिन अकेले ऐसा करने पर उनकी राज्यसभा सदस्यता जा सकती थी. इसलिए न पार्टी ने उन्हें निकाला, न वह अलग हुईं.