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Delhi High Court Order: 'बाल आश्रम में बच्चों को पिज्जा और छाछ परोसें...', पालतू जानवर को लेकर दो भिड़े पड़ोसियों को हाईकोर्ट की अनोखी सजा

Delhi High Court Order: दिल्ली हाईकोर्ट ने पालतू जानवर को लेकर झगड़े के बाद दर्ज क्रॉस एफआईआर रद्द करते हुए दोनों पड़ोसियों को आदेश दिया कि वे सरकारी बाल देखभाल केंद्र संस्कार आश्रम में बच्चों और स्टाफ को पिज्जा और छाछ परोसें. अदालत ने कहा कि इस तरह की निजी विवाद वाली आपराधिक कार्यवाही से कोई लाभ नहीं होगा और इसे खत्म करने से आपसी सौहार्द बढ़ेगा.

Km Jaya
Edited By: Km Jaya
Delhi High Court Order: 'बाल आश्रम में बच्चों को पिज्जा और छाछ परोसें...', पालतू जानवर को लेकर दो भिड़े पड़ोसियों को हाईकोर्ट की अनोखी सजा
Courtesy: Pinterest

Delhi High Court Order: दिल्ली हाईकोर्ट ने दो पड़ोसियों के बीच पालतू जानवर को लेकर हुए झगड़े में दर्ज एफआईआर रद्द करते हुए एक अनोखा फैसला सुनाया है. अदालत ने दोनों को जीटीबी नगर स्थित सरकारी संचालित संस्कार आश्रम में बच्चों और स्टाफ को पिज्जा व छाछ परोसने का आदेश दिया. यह मामला 5 मई का है, जब मानसरोवर पार्क थाने में पालतू जानवर को संभालने को लेकर हुए विवाद में पड़ोसियों ने एक-दूसरे के खिलाफ गंभीर धाराओं में एफआईआर दर्ज कराई थी.

इनमें आपराधिक धमकी, गंभीर चोट और गलत तरीके से रोकने जैसी धाराएं शामिल थीं. जस्टिस अरुण मोंगा की पीठ ने 19 अगस्त को सुनाए आदेश में कहा कि यह विवाद निजी प्रकृति का था और इसे जारी रखने से कोई उपयोगी परिणाम नहीं निकलता. अदालत ने टिप्पणी की कि इस तरह की आपराधिक कार्यवाही से दुश्मनी और बढ़ेगी, जबकि इन्हें खत्म करने से आपसी सौहार्द बढ़ेगा.

गलतफहमी की वजह से हुआ विवाद

सुनवाई के दौरान दोनों पक्ष अदालत में पेश हुए और स्वतंत्र इच्छा से मामले को सुलझाने की बात स्वीकार की. वकीलों ने अदालत को बताया कि यह पूरा विवाद आपसी गलतफहमी से उपजा था और अब दोनों पक्ष समझौते पर पहुंच चुके हैं. सुनवाई के दौरान यह भी बताया गया कि एक शिकायतकर्ता पिज्जा बनाने और बेचने के व्यवसाय से जुड़ा हुआ है. 

पिज्जा और छाछ परोसने का आदेश 

इसी आधार पर अदालत ने दोनों पक्षों को सामाजिक सेवा के रूप में बच्चों और स्टाफ को पिज्जा और छाछ परोसने का आदेश दिया. चार पन्नों के आदेश में अदालत ने लिखा कि ऐसी परिस्थितियों में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना कानून की प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा. अदालत ने कहा कि एफआईआर रद्द करने से पड़ोसियों के बीच भाईचारा और सौहार्द की भावना मजबूत होगी.