menu-icon
India Daily

दिल्ली ब्लास्ट मामले में तुर्की कनेक्शन! आरोपी उमर 2022 में दो साथियों के साथ गया था तुर्की, बड़े आतंकी नेटवर्क की आशंका

दिल्ली रेड फोर्ट मेट्रो स्टेशन धमाके की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है. मुख्य आरोपी डॉ. उमर और उसके दो साथियों ने 2022 में तुर्की यात्रा की थी, जिससे अंतरराष्ट्रीय आतंकी नेटवर्क की आशंका जताई जा रही है.

Kuldeep Sharma
Edited By: Kuldeep Sharma
दिल्ली ब्लास्ट मामले में तुर्की कनेक्शन! आरोपी उमर 2022 में दो साथियों के साथ गया था तुर्की, बड़े आतंकी नेटवर्क की आशंका
Courtesy: social mdia

नई दिल्ली: दिल्ली में लाल किला मेट्रो स्टेशन के पास हुए कार धमाके की जांच ने सुरक्षा एजेंसियों के होश उड़ा दिए हैं. जांच में सामने आया है कि मुख्य आरोपी डॉ. उमर नबी और उसके दो साथी 2022 में तुर्की गए थे, जहां वे कई संदिग्ध लोगों से मिले थे. 

यह यात्रा अब इस बात की ओर इशारा कर रही है कि यह हमला किसी बड़े आतंकी नेटवर्क की साजिश का हिस्सा था. जांच एजेंसियां अब पूरे मॉड्यूल के विदेशी कनेक्शन की तहकीकात में जुट गई हैं.

तुर्की यात्रा से खुली साजिश की परतें

जांच एजेंसियों के मुताबिक, डॉ. उमर उ नबी, जो धमाके वाली कार चला रहा था, मार्च 2022 में अपने दो सहयोगियों, डॉ. मुझफ्फर अहमद राथर और डॉ. मुजम्मिल शकील के साथ तुर्की गया था. यह तीनों वहां करीब दो हफ्ते रहे और लगभग 14 संदिग्ध व्यक्तियों से मिले. इनमें से एक व्यक्ति यूपी के सहारनपुर में गिरफ्तार आरोपी अदील का भाई बताया जा रहा है. यह मुलाकातें अब पूरे नेटवर्क की दिशा में संकेत दे रही हैं.

2021 से शुरू हुई आतंकी गतिविधियों की कड़ी

सूत्रों के अनुसार, उमर और उसके साथियों की आतंकी यात्रा 2021 के अंत से शुरू हुई थी. बताया जा रहा है कि तुर्की यात्रा से पहले ही इन तीनों ने नेटवर्क से जुड़ने की योजना बनाई थी. हालांकि अब तक इस बात का कोई सबूत नहीं मिला है कि इनका पाकिस्तान से कोई सीधा संपर्क था. लेकिन जांच एजेंसियां इस बात से इंकार नहीं कर रहीं कि विदेशों में किसी संगठन से इन्हें समर्थन मिला हो सकता है.

जम्मू-कश्मीर से दिल्ली तक फैला नेटवर्क

आरोपियों में डॉ. मुझफ्फर अहमद राथर पुलवामा जिले के वुनपोरा गांव का रहने वाला है, जबकि डॉ. मुजम्मिल शकील कोइल, पुलवामा का निवासी है. जांच में पता चला है कि मुजम्मिल कई सालों से फरीदाबाद के अल-फलाह मेडिकल कॉलेज में काम कर रहा था. वहीं उसने किराए पर कमरा लेकर वहां विस्फोटक और हथियारों का जखीरा जमा किया था. उसके कमरे से 350 किलो से अधिक संदिग्ध विस्फोटक सामग्री, राइफलें, गोलियां और टाइमर बरामद किए गए हैं.

विस्तृत जांच और नई गिरफ्तारियों की संभावना

धमाके के बाद अब दिल्ली-एनसीआर, उत्तर प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में छापेमारी तेज कर दी गई है. सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि यह नेटवर्क पेशेवर और अकादमिक पहचान के सहारे लंबे समय से सक्रिय था. जांचकर्ता अब यह पता लगाने की कोशिश कर रहे हैं कि डॉक्टरों की यह टीम कैसे बिना शक के इतनी बड़ी साजिश को अंजाम देने में सफल हुई.

विदेशी कनेक्शन की पड़ताल तेज

एनआईए और दिल्ली पुलिस की विशेष टीमें अब तुर्की में हुई मुलाकातों की जानकारी जुटा रही हैं. यह भी जांच की जा रही है कि तीनों ने वहां किन संस्थाओं या व्यक्तियों से संपर्क किया था. अधिकारियों का कहना है कि जब तक इस मॉड्यूल के विदेशी लिंक का पूरा खुलासा नहीं हो जाता, तब तक जांच जारी रहेगी. एजेंसियों का फोकस अब इन तीनों के डिजिटल फुटप्रिंट और बैंक लेनदेन पर है.