छत्तीसगढ़ के वेदांता पावर प्लांट में विस्फोट से मरने वालों की संख्या हुई 24, रविवार को एक और मजदूर ने इलाज के दौरान तोड़ा दम
यह विस्फोट 14 अप्रैल को दिनदहाड़े हुआ था. प्लांट के बॉयलर में अत्यधिक ईंधन जमा होने से प्रेशर बढ़ गया और भीषण धमाका हुआ. चार मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि 15 अप्रैल को सात और मजदूरों ने अस्पतालों में दम तोड़ दिया.
छत्तीसगढ़ के सक्ती जिले के सिंहितराई गांव स्थित वेदांता लिमिटेड के पावर प्लांट में हुए भीषण विस्फोट ने अब तक 24 लोगों की जान ले ली है. रविवार सुबह रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एक और झारखंड निवासी मजदूर की इलाज के दौरान मौत हो गई. यह विस्फोट 14 अप्रैल को उस समय हुआ था, जब बॉयलर से टर्बाइन तक हाई-प्रेशर भाप ले जाने वाली एक स्टील ट्यूब फट गई. हादसे के बाद से अब तक दर्जनों परिवार तबाह हो चुके हैं. प्रशासन और कंपनी पर सवाल उठ रहे हैं.
मजदूर ने इलाज के दौरान तोड़ा दम
रविवार सुबह रायगढ़ मेडिकल कॉलेज में एक और घायल मजदूर ने दम तोड़ दिया. यह मजदूर झारखंड का रहने वाला था और पिछले छह दिनों से जिंदगी और मौत की जंग लड़ रहा था. उससे पहले शनिवार को दो मजदूरों की मौत हुई थी. इनमें पश्चिम बंगाल के मेदिनीपुर का रहने वाला सुब्रत कुमार जना और झारखंड के गढ़वा का उपेंद्र साह शामिल हैं. दोनों के शरीर का 90 फीसदी से अधिक हिस्सा जल चुका था. फिलहाल अलग-अलग अस्पतालों में करीब एक दर्जन मजदूरों का इलाज चल रहा है, जिनमें से तीन की हालत नाजुक बताई जा रही है. हर गुजरते दिन के साथ मौतों का आंकड़ा बढ़ता जा रहा है.
14 अप्रैल का वो काला दिन
यह विस्फोट 14 अप्रैल को दिनदहाड़े हुआ था. प्लांट के बॉयलर में अत्यधिक ईंधन जमा होने से प्रेशर बढ़ गया और भीषण धमाका हुआ. चार मजदूरों ने मौके पर ही दम तोड़ दिया जबकि 15 अप्रैल को सात और मजदूरों ने अस्पतालों में दम तोड़ दिया. 16 अप्रैल की रात रायपुर के एक अस्पताल में एक और मजदूर की जान चली गई. अब रविवार को यह आंकड़ा 24 पहुंच गया है. मृतकों में सात मजदूर पश्चिम बंगाल, पांच छत्तीसगढ़, चार झारखंड, तीन उत्तर प्रदेश और दो-दो बिहार व मध्य प्रदेश के हैं. ये सभी मजदूर रोजी-रोटी के लिए दूर अपने घरों से आए थे.
जांच में बड़ी गड़बड़ी का हुआ खुलासा
पुलिस और फोरेंसिक जांच में खुलासा हुआ है कि बॉयलर फर्नेस के अंदर अत्यधिक ईंधन जमा होने से प्रेशर बढ़ा और धमाका हुआ. सक्ती की फोरेंसिक लैब ने भी इसकी पुष्टी की है. सूत्रों के अनुसार, पिछले एक साल में उत्पादन के दौरान कई बार तकनीकी गड़बड़ियां देखी गई थीं. सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि विस्फोट से महज 10 दिन पहले ही एक तकनीकी खराबी के कारण प्लांट को थोड़े समय के लिए बंद करना पड़ा था. पुलिस ने वेदांता ग्रुप के चेयरमैन अनिल अग्रवाल और प्लांट हेड देवेंद्र पटेल समेत 8 से 10 लोगों के खिलाफ लापरवाही से मौत और मशीनरी के लापरवाही से संचालन की धाराओं में मामला दर्ज किया है.