बिहार में सम्राट बनें सीएम तो 'विजय-विजेंद्र' को मिला उपमुख्यमंत्री पद, जानें दोनों नेताओं का पूरा बैकग्राउंड

सम्राट चौधरी को बिहार का मुख्यमंत्री बनाया गया है. वहीं नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव को उपमुख्यमंत्री का पद सौंपा गया है. आइए देखते हैं इन दोनों नेताओं का पॉलीटिकल बैकग्राउंड.

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Shanu Sharma

बिहार में पहली बार बीजेपी का मुख्यमंत्री बनाया गया. सम्राट चौधरी ने आज मुख्यमंत्री पद की शपथ ली. उनके साथ नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू से दो नेताओं को डिप्टी सीएम पद की शपथ दिलाई गई. 

जेडीयू के नेता विजय कुमार चौधरी और विजेंद्र यादव को डिप्टी सीएम पद की जिम्मेदारी दी गई है. हालांकि पिछली सरकार में जेडीयू की ओर से नीतीश कुमार मुख्यमंत्री थे और बीजेपी के दो उपमुख्यमंत्री थे, लेकिन अब भूमिका उलट गई है. 

कौन हैं विजेंद्र प्रसाद यादव?

विजेंद्र प्रसाद यादव बिहार की राजनीति के एक स्थिर और अनुभवी स्तंभ हैं. उनका राजनीतिक सफर 1990 में शुरू हुआ, जब उन्होंने कोसी क्षेत्र के सुपौल से जनता दल के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा प्रवेश किया. तब से लेकर अब तक वे लगातार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं. 1990 का दशक बिहार में बड़े राजनीतिक परिवर्तनों का समय था. कांग्रेस के बाद जनता दल की लहर में विजेंद्र यादव उभरे.

विजेंद्र याद को लालू प्रसाद यादव का राइट हैंड माना जाता था. 1991 में उन्हें राज्य मंत्री बनाया गया, बाद में कैबिनेट मंत्री और नगर विकास मंत्री का दायित्व मिला. 1997 में जनता दल के विभाजन के समय उन्होंने शरद यादव का साथ दिया और बाद में नीतीश कुमार के साथ जेडीयू में शामिल हो गए. 2005 में पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष रहते हुए उन्होंने जेडीयू को सत्ता तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई. 

कौन हैं विजय कुमार चौधरी?

विजय कुमार चौधरी समस्तीपुर जिले के रहने वाले हैं. उन्होंने शुरुआत में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया में नौकरी की, लेकिन पारिवारिक राजनीतिक पृष्ठभूमि के कारण कांग्रेस से राजनीति में कदम रखा. अस्सी के दशक में वे कांग्रेस के विधायक बने और सीएलपी लीडर तक पहुंचे. नीतीश कुमार उन्हें अपना 'राइट हैंड' मानते हैं. वे हर चुनौतीपूर्ण परिस्थिति में नीतीश के साथ मजबूती से खड़े रहे हैं. बिहार सरकार में उन्होंने संसदीय कार्य, जल संसाधन, शिक्षा, ग्रामीण विकास और सूचना एवं जनसंपर्क जैसे महत्वपूर्ण विभाग संभाले. 2015 से 2020 तक वे बिहार विधानसभा के अध्यक्ष भी रहे. अप्रैल 2026 के इस सत्ता परिवर्तन में उन्होंने दिल्ली-पटना के बीच समन्वय की अहम भूमिका निभाई. अब उपमुख्यमंत्री पद पर वे विकास योजनाओं को तेज गति देने पर फोकस करेंगे.