RJD समर्थकों ने ही तेजस्वी के 'विनिंग प्लेन' की करा दी इमरजेंसी लैंडिंग, पीएम मोदी के 'कट्टा' ने बदल दिया खेल!
बिहार चुनाव में आरजेडी समर्थकों के विवादित गाने और गाली-गलौज वाले वीडियो पार्टी की छवि पर भारी पड़े. तेजस्वी के वादों के बावजूद मतदाताओं में नकारात्मक असर हुआ, जिससे NDA को भारी फायदा मिला.
पटना: बिहार विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान राजनीतिक दलों के समर्थकों द्वारा बनाए गए कई प्रमोशनल गाने खूब वायरल हुए. लेकिन ये गाने मनोरंजन कम और नुकसान ज्यादा पहुंचाने वाले साबित हुए. खासकर आरजेडी समर्थकों द्वारा बनाए गए कुछ वीडियो इतने विवादित रहे कि उनका असर सीधे चुनाव परिणामों पर दिखाई दिया. चुनावी विशेषज्ञों का मानना है कि इन गैर-जिम्मेदार प्रचार तरीकों ने पार्टी की छवि को खराब किया, जिसके कारण आरजेडी सिर्फ 25 सीटों पर सिमट कर रह गई.
कट्टा वाले गाने ने बढ़ाया विवाद
समस्तीपुर के मोहिउद्दीनगर में पहले चरण के प्रचार के दौरान आरजेडी के एक मंच से एक बच्चे द्वारा गाया गया गाना सबसे ज्यादा चर्चा में रहा. गाने के बोल इतने आपत्तिजनक थे कि मामला राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग तक पहुंच गया. गाने में कहा गया था कि तेजस्वी यादव मुख्यमंत्री बनेंगे तो समर्थक लाठी नहीं, बल्कि कट्टा लेकर घूमेंगे. इस बात ने कई मतदाताओं के मन में डर और नाराजगी पैदा की. इसके बाद जिले के डीएम को भी नोटिस भेजा गया. यह पूरा मामला राजद की छवि के लिए बड़ा नुकसान साबित हुआ.
खुलेआम गाली-गलौज ने बिगाड़ा माहौल
एक और घटना में, दुलारचंद यादव की शवयात्रा के दौरान कई लोगों ने एक विशेष समुदाय को लेकर गाली-गलौज की. प्रशासन हंगामे के डर से चुप रहा, लेकिन इसे देखने-सुनने वाले लोगों के मन में नाराजगी भर गई. विशेषज्ञ कहते हैं कि ऐसे व्यवहार का सीधा असर वोटिंग पर पड़ा. जिन लोगों को गालियों का सामना करना पड़ा, उन्होंने चुपचाप मतदान के जरिए इसका जवाब दिया.
तेजस्वी के वादों पर था भरोसा, पर समर्थकों ने किया खेल खराब
शुरुआती दौर में काफी मतदाताओं को विश्वास था कि तेजस्वी यादव के विकास से जुड़े वादे असर दिखाएंगे. हर घर से एक नौकरी, जीविका दीदियों को 30 हजार रुपये वेतन जैसे वादों ने आम लोगों को आकर्षित किया था. लेकिन आरजेडी समर्थकों द्वारा बनाए गए अभद्र गानों और वीडियो ने इस भरोसे को कमजोर कर दिया. लोगों में यह संदेश गया कि कुछ समर्थक माहौल बिगाड़ सकते हैं और पार्टी उन्हें रोकने में असमर्थ है.
NDA ने माहौल अपने पक्ष में किया
इसके बाद प्रधानमंत्री मोदी के उस भाषण ने स्थिति और स्पष्ट कर दी जिसमें उन्होंने ‘कट्टा संस्कृति’ का जिक्र किया. एनडीए की पार्टियों बीजेपी, जेडीयू, लोजपा रामविलास, हम और आरएलएम ने इस मुद्दे को लोगों के बीच अच्छी तरह फैलाया कि राजद की सत्ता आने पर फिर से ‘जंगलराज’ लौट सकता है. इस नैरेटिव ने मतदाताओं के मन में डर और संदेह पैदा किया, जिसका नतीजा था NDA का रिकॉर्ड बहुमत.
चुनौती नेताओं से नहीं, समर्थकों से
विशेषज्ञों का कहना है कि इस चुनाव में तेजस्वी यादव की असली चुनौती नीतीश कुमार या नरेंद्र मोदी नहीं थे, बल्कि उनके वे समर्थक थे जिन्होंने बिना सोचे-समझे गाना, नारे और वीडियो बनाकर माहौल खराब किया. तेजस्वी ने अपनी तरफ से कई वादे किए, लेकिन उन्होंने ऐसे हुड़दंगी व्यवहार के खिलाफ कोई सख्त संदेश नहीं दिया. परिणाम यह हुआ कि उनकी उम्मीदों के पैराशूट’ में उन्हीं के समर्थकों ने छेद कर दिया.