पटना: बिहार विधानसभा चुनाव के नतीजे आने में अब चंद घंटे बाकी हैं, लेकिन उससे पहले एग्जिट पोल ने सियासी पारा गरम कर दिया है. बुधवार को जारी टुडेज चाणक्या के सर्वे ने सबको हैरान कर दिया है. सबसे बड़ा झटका तेजस्वी यादव की राजद को लगा है, क्योंकि उनका पारंपरिक वोटबैंक माने जाने वाले यादव समुदाय में इस बार NDA ने भारी सेंध लगाई है.
यादव वोटों में NDA की ऐतिहासिक घुसपैठचाणक्या के आंकड़ों के मुताबिक, बिहार के यादव मतदाताओं में से करीब 23 फीसदी ने NDA गठबंधन को वोट दिया है, जबकि महागठबंधन (राजद-कांग्रेस-वाम) को 67 फीसदी यादव वोट ही मिल पाए हैं. (±3% का मार्जिन रखा गया है). यह आंकड़ा इसलिए चौंकाने वाला है क्योंकि पिछले तीन दशकों से यादव वोट लगभग एकतरफा लालू-तेजस्वी की झोली में गिरता रहा है.
23% यादवों का NDA की ओर खिसकना राजद के लिए किसी बड़े भूचाल से कम नहीं है. मुस्लिम वोटों में भी हलचलमुस्लिम वोटबैंक को लेकर भी पुराना समीकरण टूटता नजर आ रहा है. चाणक्या के सर्वे में NDA को 12 फीसदी मुस्लिम वोट मिलने का अनुमान है, जबकि महागठबंधन को 69 फीसदी. यानी करीब 20 फीसदी मुस्लिम वोटर या तो NOTA दबा रहे हैं या तीसरे विकल्प की ओर जा रहे हैं.जातीय समीकरणों का पूरा ब्रेकअपटुडेज चाणक्या ने अन्य जातियों के वोटिंग पैटर्न भी जारी किए हैं, जो NDA के लिए खुशखबरी लेकर आए हैं.
दलित (SC) वोट: NDA को 58%, महागठबंधन को 26%
अति पिछड़ा (EBC) और OBC: NDA को 55%, महागठबंधन को 24%
उच्च जाति (ब्राह्मण, राजपूत, बनिया): NDA को 63%, महागठबंधन को 19%
मोहन यादव को सौंपा कमान
यूपी, हरियाणा, बिहार में यादव की जनसंख्या काफी है. आमतौर में यूपी में यादव वोटबैंक का ज्यादातर हिस्सा समाजवादी पार्टी और बिहार में लालू प्रसाद यादव की आरजेडी को जाता रहा है. लंबे समय से भाजपा इस वोटबैंक को अपने पक्ष में करने की जुगत में लगी रही है. इसी के चलते मध्य प्रदेश में भाजपा ने मोहन यादव को राज्य की कमान सौंपते हुए मुख्यमंत्री बनाया. इसके बाद से पार्टी ने उन्हें एमपी के अलावा यूपी और बिहार में भी काफी सक्रिय रखा है. बिहार विधानसभा चुनाव में भी मोहन यादव ने कई रैलियां की थीं.